राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में 12 साल पुराने रिश्वत मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जहाजपुर थाने में तैनात रहे पूर्व एएसआई (सहायक उप निरीक्षक) कालूराम को रिश्वत लेने का दोषी माना गया है। एसीबी कोर्ट ने उन्हें 4 साल की जेल और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला साल 2014 का है, जब उन पर एक जमीन विवाद में कार्रवाई करने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगा था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब अदालत ने फैसला सुना दिया है।
जमीन विवाद में मांगे थे 3 हजार रुपये
जानकारी के मुताबिक, जहाजपुर क्षेत्र के रहने वाले रमेशचंद्र मीणा और फोरूलाल मीणा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन से जुड़े मामले में पुलिस कार्रवाई के लिए एएसआई कालूराम 3 हजार रुपये रिश्वत मांग रहे थे। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि वे पहले ही 1000 रुपये और एक मुर्गा दे चुके थे, लेकिन इसके बाद भी उनसे 2 हजार रुपये और मांगे जा रहे थे। इससे परेशान होकर उन्होंने एसीबी से शिकायत कर दी।
रंगे हाथ पकड़ा गया आरोपी
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच की। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और 25 जुलाई 2014 को कालूराम को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े सबूत जुटाए और अदालत में पेश किए। इसके बाद मामला कोर्ट में चला, जहां कई साल तक सुनवाई होती रही। इस दौरान गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की जांच की गई।
कोर्ट ने कहा- भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
लंबी सुनवाई के बाद एसीबी कोर्ट ने कालूराम को दोषी माना। अदालत ने उन्हें 4 साल की सजा और 15 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया। कोर्ट के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत लेना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कानून अपना काम जरूर करता है। इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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