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मौत और जिंदगी के बीच हवा में लटके 300 सैलानी, फिर जो हुआ… देख फटी रह गईं सबकी आंखें!

गुलमर्ग गोंडोला रोपवे में आई तकनीकी खराबी के बाद हवा में लटके 300 पर्यटकों की सांसें अटक गईं। जानिए कैसे भारतीय सेना और रेस्क्यू टीमों ने मौत के मुंह से जिंदगियों को सुरक्षित बाहर निकाला।

गुलमर्ग

का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में घूमने आए सैकड़ों पर्यटकों के लिए एक शाम किसी खौफनाक मंजर में बदल गई। दुनिया के सबसे ऊंचे और मशहूर रोपवे सिस्टम्स में से एक ‘गुलमर्ग गोंडोला’ में अचानक आई तकनीकी खराबी ने पल भर में चीख-पुकार मचा दी। देखते ही देखते करीब 300 सैलानी जमीन से सैकड़ों फीट ऊपर हवा में लटकी केबिनों (गोंडोला) में कैद हो गए। नीचे गहरी खाई, चारों तरफ घना जंगल और पहाड़ों की बर्फीली हवाओं के बीच इन मासूम जिंदगियों की सांसें अटक गईं। इस भयानक संकट के समय हर कोई बस किसी चमत्कार की दुआ कर रहा था।

जब थम गईं 300 सांसें: गुलमर्ग के आसमान में पसरा खौफ

सैलानी अपनी वादियों की सैर का लुत्फ उठा ही रहे थे कि अचानक पूरा रोपवे सिस्टम थम गया। शुरुआती कुछ मिनटों की खामोशी के बाद जब लोगों को अहसास हुआ कि वे फंस चुके हैं, तो हवा में लटके केबिनों के अंदर डर का माहौल बन गया। लगभग 65 अलग-अलग केबिनों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बंद थे। पहाड़ों पर मौसम लगातार करवट बदल रहा था, जिससे केबिन हवा में डोलने लगे थे। मोबाइल नेटवर्क के कमजोर होने और नीचे दिखती गहरी खाई ने पर्यटकों के सब्र का बांध तोड़ दिया। वहां मौजूद स्थानीय लोग भी इस मंजर को देखकर सहम गए थे और तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दी गई।

देवदूत बनकर उतरी भारतीय सेना: ऐसे शुरू हुआ ‘महा-ऑपरेशन’

जैसे ही इस बड़े हादसे की खबर सेना तक पहुंची, भारतीय सेना के जांबाज बिना एक पल गंवाए ‘फरिश्ता’ बनकर मोर्चे पर डट गए। सेना की नॉर्दर्न कमांड और चिनार कॉर्प्स ने तुरंत कमान संभाली। इस बेहद संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF, SDRF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। चुनौती सिर्फ लोगों को बचाने की नहीं थी, बल्कि ढलती शाम, बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थिति और लगातार खराब होते मौसम से लड़ने की भी थी। लेकिन भारतीय जवानों के हौसलों के आगे प्रकृति की हर चुनौती बौनी साबित हुई।

सूझबूझ से जीती जंग: सुरक्षित निकाले गए सभी 300 पर्यटक

केबिनों में फंसे लोगों तक पहुंचना बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि जरा सी चूक किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे सकती थी। रेस्क्यू टीमों ने आधुनिक उपकरणों और गजब के तालमेल का इस्तेमाल करते हुए एक-एक करके सभी 65 केबिनों से पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतारना शुरू किया। बच्चों और घबराए हुए बुजुर्गों को पहले ढांढस बंधाया गया और फिर सुरक्षित निकाला गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत और सेना के कड़े अनुशासन की बदौलत सभी 300 पर्यटकों को बिना किसी खरोंच के सुरक्षित बचा लिया गया। सुरक्षित जमीन पर कदम रखते ही कई सैलानियों की आंखों से आंसू छलक पड़े।

सोशल मीडिया पर ‘सलाम’: इंटरनेट पर छा गए सेना के जांबाज

इस रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन के वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आए, देश भर में भारतीय सेना की तारीफों के पुल बंध गए। यूजर्स ने जवानों के साहस और तत्परता की जमकर सराहना की। लोगों ने लिखा कि जब भी देश या देशवासियों पर कोई विपदा आती है, हमारी सेना हमेशा ढाल बनकर खड़ी हो जाती है। गुलमर्ग का यह सफल अभियान सिर्फ एक बचाव कार्य नहीं था, बल्कि यह हमारे जवानों के अदम्य साहस, निस्वार्थ सेवा और इंसानियत की एक ऐसी मिसाल है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा।

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