Maharashtra Illicit Liquor Case: महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी चिंचवड़ इलाके में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि शराब के कारोबार से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए उसमें खतरनाक रासायनिक पदार्थ मिलाया गया था। पुलिस के अनुसार इस मिलावट ने शराब को जहरीला बना दिया, जिसके कारण इसे पीने वाले लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। कई लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनमें से कई को बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोगों के बीच अवैध शराब के कारोबार को लेकर गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने की बात कह रहा है।
जांच में खुला बड़ा राज, शराब में मिलाया गया था मेथनॉल
पुलिस जांच में जो जानकारी सामने आई है, उसने सभी को हैरान कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक मुख्य आरोपी ने शराब की मात्रा बढ़ाने और अधिक कमाई करने के उद्देश्य से उसमें मेथनॉल नामक रासायनिक पदार्थ मिलाया था। मेथनॉल एक बेहद खतरनाक तत्व माना जाता है, जो मानव शरीर के लिए विष के समान होता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि शराब में इसकी मिलावट के कारण लोगों की आंखों, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर असर पड़ा। कई लोगों की हालत इतनी खराब हो गई कि इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि आरोपी सस्ते दामों पर शराब खरीदकर उसे अलग-अलग क्षेत्रों में ऊंची कीमत पर बेचता था। बाद में मुनाफा और बढ़ाने के लिए उसने ऑनलाइन माध्यम से मेथनॉल मंगवाया और उसे शराब में मिलाना शुरू कर दिया। यही लालच आखिरकार कई परिवारों के लिए मौत का कारण बन गया। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पुराने रिकॉर्ड भी खंगाल रही पुलिस
इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े को गिरफ्तार कर लिया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी का नाम पहले भी अवैध शराब के कारोबार से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। उसके खिलाफ कई पुराने मामले दर्ज बताए जा रहे हैं और वह पहले भी कानून के शिकंजे में आ चुका है। अब पुलिस और आबकारी विभाग उसकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जुटा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। इसी कारण कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि जहरीली शराब किन-किन दुकानों और इलाकों तक पहुंचाई गई थी। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
प्रशासन पर उठे सवाल, लोगों से सतर्क रहने की अपील
इस दुखद घटना के बाद प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चल रहा था, फिर भी संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। कई सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं राज्य सरकार ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को अवैध शराब के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। इस बीच आबकारी विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही शराब खरीदें तथा किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सख्त निगरानी ही ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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