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लखनऊ में ‘भारत विरोधी दशानन’ के पोस्टर से मचा बवाल! रावण के 10 सिरों पर राहुल-अखिलेश समेत इन चेहरों को क्यों दिखाया गया?

लखनऊ में सनातन रक्षा संगठन के 'भारत विरोधी दशानन रावण' पोस्टर चर्चा में हैं। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, अतीक अहमद और एलन मस्क समेत 10 चेहरों को शामिल करने की वजह जानिए।

'भारत विरोधी दशानन' के पोस्टर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘भारत विरोधी दशानन रावण’ के नाम से लगाए गए पोस्टर चर्चा का विषय बन गए हैं। शहर के अलग-अलग चौराहों पर लगाए गए इन पोस्टरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और दिवंगत पूर्व सांसद अतीक अहमद समेत 10 लोगों के चेहरे दिखाए गए हैं। पोस्टर में अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क सहित कई विदेशी हस्तियों को भी जगह दी गई है। ये पोस्टर सनातन रक्षा संगठन की ओर से लगाए जाने की बात कही जा रही है। संगठन ने इन चेहरों को रावण के दस सिरों के रूप में दिखाकर भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, पोस्टर में लगाए गए आरोप संगठन के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रावण के दस सिरों पर किन-किन लोगों के चेहरे?

पोस्टर में कुल 10 चेहरों को रावण के अलग-अलग सिरों की तरह दर्शाया गया है। इनमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, एलन मस्क, अमेरिकी सांसद इल्हान उमर, बांग्लादेश के मोहम्मद यूनुस, जॉर्ज सोरोस, प्रशांत भूषण समेत अन्य नाम शामिल बताए गए हैं। संगठन ने इन लोगों पर भारत के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को प्रभावित करने या देश के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने जैसे आरोप लगाए हैं। पोस्टर की खास बात यह है कि इसमें भारतीय नेताओं के साथ विदेशी हस्तियों को भी शामिल किया गया है। इसी वजह से यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम या तस्वीर पोस्टर में होने से उस पर लगाए गए आरोप साबित नहीं होते।

 एलन मस्क से लेकर मोहम्मद यूनुस तक, संगठन ने क्या लगाए आरोप?

सनातन रक्षा संगठन ने पोस्टर के जरिए कई मुद्दों पर अपनी आपत्ति जताई है। संगठन ने एलन मस्क के सोशल मीडिया पोस्ट और इल्हान उमर के भारत से जुड़े बयानों तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के दौरे का हवाला दिया है। वहीं, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मोहम्मद यूनुस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने जॉर्ज सोरोस पर भारत को अस्थिर करने की कोशिशों से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इसके अलावा अखिलेश यादव और प्रशांत भूषण को लेकर संगठन ने राजनीतिक गतिविधियों तथा कथित तौर पर सत्ता परिवर्तन संबंधी बयानों का जिक्र किया है। इन आरोपों को संगठन के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

लखनऊ के चौराहों पर पोस्टर से बढ़ी चर्चा

राजधानी के अलग-अलग चौराहों पर लगे इन पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल में नई चर्चा शुरू कर दी है। पोस्टर के जरिए संगठन ने अपने विचार और विरोध सार्वजनिक रूप से जाहिर करने की कोशिश की है। इसमें कई राजनीतिक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को एक साथ शामिल किए जाने के कारण मामला और चर्चा में आ गया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में पोस्टर को लेकर संबंधित नेताओं या विदेशी हस्तियों की प्रतिक्रिया का विवरण नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पोस्टर लगाने के मामले में प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई की गई है या नहीं। ऐसे में आगे की स्थिति पर नजर रहेगी। साथ ही, पोस्टर में लगाए गए आरोपों और वास्तविक तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।

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