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क्या बदलेगा बांग्लादेश का सियासी भविष्य? 11वें प्रधानमंत्री के रूप में तारिक रहमान ने ली शपथ, 25 मंत्रियों के साथ नई सरकार की शुरुआत

बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय से जारी अस्थिरता के बाद मंगलवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया, जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने देश के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। ढाका स्थित संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शाम करीब 4 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में देश-विदेश की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और लंबे समय से बीएनपी की राजनीति का अहम चेहरा रहे हैं। आम चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनूस की जगह औपचारिक रूप से सत्ता संभाली। इस शपथ ग्रहण को बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से देश राजनीतिक उथल-पुथल और छात्र आंदोलनों के दौर से गुजर रहा था।

25 सदस्यीय मंत्रिमंडल में अनुभवी और नए चेहरे

प्रधानमंत्री के साथ ही 25 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी शपथ ली, जिसमें कई अनुभवी नेताओं और कुछ नए चेहरों को शामिल किया गया है। विदेश मंत्री के रूप में डॉ. खलीलुर रहमान, गृह मंत्री के तौर पर सलाहुद्दीन अहमद और वित्त व योजना मंत्री के रूप में डॉ. अमीर खसरू महमूद को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा शमा ओबैद को विदेश राज्य मंत्री बनाया गया है। कैबिनेट में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू महमूद चौधरी, इकबाल हसन महमूद, हाफिज उद्दीन अहमद, अबू जफर मोहम्मद जाहिद हुसैन, अब्दुल अव्वल मिंटू, काजी शाह मोफज्जल हुसैन, मिजानुर रहमान मीनू समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। खास बात यह रही कि निताई रॉय चौधरी जैसे हिंदू नेता और दीपेन दीवान जैसे अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले चेहरों को भी कैबिनेट में जगह मिली, जिससे सरकार ने समावेशी संदेश देने की कोशिश की है। राज्य मंत्रियों की सूची में भी कई युवा और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों को शामिल कर संतुलन साधने की कोशिश की गई है। नई टीम को आर्थिक सुधार, कानून-व्यवस्था की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी और विपक्ष से संवाद का संकेत

शपथ ग्रहण समारोह में कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिससे यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बन गया। भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ढाका पहुंचे और नई सरकार को शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा मलेशिया, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की और श्रीलंका के प्रतिनिधि भी समारोह में मौजूद रहे। चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई को भी आमंत्रण भेजा गया था। शपथ से पहले बीएनपी की संसदीय दल की बैठक में तारिक रहमान को औपचारिक रूप से नेता चुना गया। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान और नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम से मुलाकात कर विपक्ष के साथ संवाद का संकेत भी दिया। यह कदम राजनीतिक स्थिरता और सहयोग की दिशा में अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार यदि विपक्ष को साथ लेकर चलती है तो बांग्लादेश में लंबे समय से चली आ रही टकराव की राजनीति में कमी आ सकती है।

 बहुमत के साथ सत्ता में लौटी बीएनपी

हाल ही में हुए आम चुनाव में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटों पर जीत मिली। चुनाव में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिससे राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म था। 12 फरवरी को हुए मतदान में अल्पसंख्यक समुदाय के चार उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की, जिनमें दो हिंदू उम्मीदवार बीएनपी के टिकट पर चुने गए। पिछले दौर में छात्र आंदोलनों और राजनीतिक हिंसा के चलते शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था, जिसके बाद अंतरिम सरकार बनी। अब नई सरकार के गठन के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाएं फिर से मजबूती के साथ काम करेंगी। आर्थिक चुनौतियां, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दे नई सरकार के सामने बड़ी परीक्षा होंगे। जनता को उम्मीद है कि तारिक रहमान की अगुवाई में देश स्थिरता और विकास की नई राह पर आगे बढ़ेगा।

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