बिहार की राजनीति में आज एक बड़े अध्याय का समापन और दूसरे की शुरुआत हुई है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आधिकारिक तौर पर बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। चूंकि नितिन नवीन हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, इसलिए संवैधानिक नियमों के तहत उन्होंने राज्य विधानसभा की सदस्यता त्याग दी है। उन्होंने अपना इस्तीफा बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को सौंपा है, जिसे आज 30 मार्च 2026 को विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस खबर के सामने आते ही सियासी गलियारों में हलचल मच गई है कि आखिर पटना की सबसे ‘हॉट’ सीट मानी जाने वाली बांकीपुर का अगला उत्तराधिकारी कौन होगा?
संवैधानिक मजबूरी और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा कद
भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार, यदि कोई विधायक संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर अपनी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना अनिवार्य होता है। नितिन नवीन के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। नितिन नवीन फिलहाल असम में चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे हैं, जिस कारण उन्होंने भौतिक रूप से उपस्थित न होकर अपना इस्तीफा संगठन के माध्यम से भेजा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनकी नई भूमिका अब उन्हें राष्ट्रीय फलक पर पूरी तरह व्यस्त रखेगी। उनके इस्तीफे के साथ ही यह साफ हो गया है कि वे अब देश की संसद में बैठकर बिहार और देश की आवाज बनेंगे, लेकिन बांकीपुर की जनता के मन में यह सवाल कौंध रहा है कि क्या अगला प्रत्याशी उनके जैसा लोकप्रिय और सुलभ होगा?
बांकीपुर: पांच बार के अपराजेय योद्धा की विरासत
नितिन नवीन का राजनीतिक सफर किसी मिसाल से कम नहीं है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के गलियारों से निकलकर पार्टी के सर्वोच्च पद तक पहुँचने वाले नवीन ने बांकीपुर सीट को भाजपा का अभेद्य दुर्ग बना दिया था। वे लगातार पांच बार (एक बार पटना पश्चिम और चार बार बांकीपुर) इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पटना की इस शहरी सीट पर उनका वर्चस्व ऐसा था कि बड़े-बड़े दिग्गजों को उन्होंने पटखनी दी। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने ‘प्लुरल्स पार्टी’ की पुष्पम प्रिया चौधरी और कांग्रेस के लव सिन्हा जैसे चर्चित चेहरों को भारी अंतर से हराया था। अब जब यह सीट रिक्त हुई है, तो भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे चेहरे को तलाशने की है जो नितिन नवीन की विरासत को न केवल संभाल सके, बल्कि पार्टी के वोट बैंक को भी बरकरार रखे।
बांकीपुर और बिहार के मेरे सभी परिवारजन एवं कार्यकर्ता साथी,
जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और दिनांक 27 अप्रैल 2006 को मैं पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत… pic.twitter.com/IHhLpd0aJD
— Nitin Nabin (@NitinNabin) March 30, 2026
कौन होगा बांकीपुर का अगला दावेदार? कयासों का बाजार गर्म
नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद अब बांकीपुर सीट पर उपचुनाव की आहट सुनाई देने लगी है। भाजपा के अंदरखाने में कई नामों पर चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो पार्टी यहाँ किसी पुराने संगठन मंत्री या किसी युवा चेहरे पर दांव लगा सकती है ताकि ‘प्रो-इंकम्बेंसी’ का लाभ मिल सके। चर्चा यह भी है कि नितिन नवीन के करीबी किसी स्थानीय नेता को मौका दिया जा सकता है जो क्षेत्र की समस्याओं से वाकिफ हो। वहीं, विपक्षी खेमा भी इस खाली हुई सीट को भाजपा के हाथ से छीनने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। बांकीपुर की जनता की उम्मीदें अब उस नाम पर टिकी हैं जो पटना के इस महत्वपूर्ण इलाके के विकास की गति को थमने नहीं देगा। आने वाले कुछ हफ्तों में भाजपा आलाकमान इस सस्पेंस से पर्दा उठा सकता है।
