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क्या खाड़ी में छिड़ी जंग अब तेल की दुनिया को हिला देगी? सऊदी की सबसे बड़ी रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, वैश्विक बाजार में मचा हड़कंप

सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी अरामको पर ड्रोन हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका-ईरान टकराव के बीच तेल बाजार में भारी उथल-पुथल, होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित और वैश्विक महंगाई की आशंका बढ़ी।

सऊदी अरब

मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने लगा है। हाल ही में सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की रास तनुरा स्थित प्रमुख तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ है। यह रिफाइनरी देश की सबसे बड़ी और रणनीतिक रूप से अहम इकाइयों में से एक मानी जाती है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हमले के बाद एहतियातन इस रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और आग पर काबू पा लिया गया है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में काले धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दे रहा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। इस घटना ने न केवल सऊदी अरब बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

कितनी अहम है रास तनुरा रिफाइनरी?

रास तनुरा रिफाइनरी सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित है और यह प्रतिदिन लगभग 5.5 लाख बैरल कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता रखती है। यह रिफाइनरी केवल सऊदी अरब ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस तरह का हमला ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहा, तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 9 से 10 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की जा चुकी है।

अमेरिका-ईरान टकराव का बढ़ता दायरा

हालिया घटनाओं की पृष्ठभूमि में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव बताया जा रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई। इसके जवाब में क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा और गहरा गया है। इस तनाव का असर सबसे ज्यादा उस समुद्री मार्ग पर पड़ा है, जिसे Strait of Hormuz के नाम से जाना जाता है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। खबर है कि बढ़ते खतरे के चलते यहां समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे निर्यात गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

वैश्विक बाजार और महंगाई पर असर

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि तेल उत्पादन से जुड़े किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे पर हमला बाजार के लिए “बुरे सपने” जैसा होता है। तेल केवल ईंधन ही नहीं बल्कि उद्योग, परिवहन और उत्पादन की रीढ़ है। ऐसे में आपूर्ति में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी सीधे महंगाई को बढ़ावा दे सकती है। एशिया और यूरोप के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं। यदि खाड़ी से निर्यात में लंबी रुकावट आती है, तो वैश्विक मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ-साथ रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। फिलहाल हालात पर सभी देशों की नजर बनी हुई है और ऊर्जा बाजार लंबी अवधि की अस्थिरता के लिए तैयार दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह तनाव कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल देता है।

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