उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा और संभवतः आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रहे हैं। अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में बीजेपी अब सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक सरकार में फिलहाल 54 मंत्री हैं और संवैधानिक सीमा के अनुसार छह नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। इस विस्तार में किसी पुराने मंत्री को हटाने की संभावना कम बताई जा रही है। बीजेपी की कोशिश है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और दलित-ओबीसी वर्गों को खास संदेश दिया जाए। यही वजह है कि जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, उनमें अलग-अलग जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साफ दिखाई दे रहा है। पार्टी यह भी चाहती है कि लोकसभा चुनाव में जिन वर्गों का समर्थन कमजोर हुआ, उन्हें फिर से अपने पक्ष में किया जाए।
भूपेंद्र चौधरी से लेकर पूजा पाल तक, कई नाम चर्चा में
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जिन चेहरों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Chaudhary का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है। वह पहले भी योगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में एमएलसी हैं। पश्चिमी यूपी में जाट राजनीति को मजबूत करने के लिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी से अलग हुए Manoj Pandey का नाम भी काफी चर्चा में है। रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं और अवध क्षेत्र में उनका प्रभाव है। वहीं चायल से विधायक Pooja Pal भी संभावित चेहरों में शामिल हैं। राजू पाल हत्याकांड के बाद लगातार चर्चाओं में रहीं पूजा पाल ने हाल के समय में खुलकर बीजेपी और योगी सरकार का समर्थन किया था। इसके अलावा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, अशोक कटारिया, कैलाश राजपूत और हंसराज विश्वकर्मा जैसे नेताओं के नाम भी तेजी से सामने आ रहे हैं। बीजेपी इस विस्तार के जरिए दलित, पिछड़ा और महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
पश्चिम और दलित वोट बैंक पर बीजेपी की खास नजर
बीजेपी को अच्छी तरह पता है कि आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के सहारे चुनावी लड़ाई को तेज करेगी। इसी वजह से योगी सरकार का यह विस्तार सिर्फ मंत्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा समझा जा रहा है। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के बाद बीजेपी को जाट और कई ओबीसी जातियों के बीच राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ा था। अब पार्टी जाट, गुर्जर, वाल्मीकि, लोध और पासी समाज को मजबूत प्रतिनिधित्व देकर संतुलन बनाने की कोशिश में है। अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं, जबकि अशोक कटारिया गुर्जर बिरादरी में प्रभाव रखते हैं। वहीं कैलाश राजपूत को लोध समाज का मजबूत प्रतिनिधि माना जाता है। बीजेपी का फोकस इस बार साफ तौर पर उन जातियों पर दिखाई दे रहा है जिनके वोटों में हाल के चुनावों में बदलाव देखने को मिला था। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि सरकार और संगठन दोनों में सभी वर्गों को बराबर भागीदारी दी जा रही है।
अखिलेश यादव ने कसा तंज, राजनीतिक हलचल तेज
कैबिनेट विस्तार से पहले विपक्ष ने भी सरकार पर हमला तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि “लगता है दिल्ली से पर्ची आ गई है।” इसके साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण और महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा भी उठाया। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि बीजेपी इस विस्तार के जरिए केवल संगठनात्मक संतुलन नहीं बल्कि चुनावी संदेश भी देना चाहती है। खास बात यह है कि पूर्वांचल में पहले से ही बीजेपी का दबदबा मजबूत माना जाता है क्योंकि प्रधानमंत्री Narendra Modi वाराणसी से सांसद हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पूर्वांचल से आते हैं। ऐसे में इस बार पश्चिम और अवध को ज्यादा प्राथमिकता मिल सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर योगी कैबिनेट में किन छह चेहरों की एंट्री होती है और किसे कौन सा विभाग मिलता है। माना जा रहा है कि आज होने वाला यह विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की सबसे अहम राजनीतिक चाल साबित हो सकता है।