बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले को खाली करने का नोटिस जारी होने के बाद भी लालू परिवार के वहां बने रहने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने ऐसा दावा किया है, जिसने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। उन्होंने कहा कि इस आवास से जुड़ा एक बड़ा राज सामने आ सकता है, इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है और लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर इस बंगले को लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है।
JDU ने उठाई खुदाई कराने की मांग
जेडीयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि 10 सर्कुलर रोड परिसर में कई ऐसे हिस्से हो सकते हैं जिनकी जांच जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि पुरातत्व विभाग की मदद से पूरे परिसर की खुदाई कराई जाए ताकि वहां मौजूद संभावित तहखानों और अन्य संरचनाओं की सच्चाई सामने आ सके। नीरज कुमार का दावा है कि इन जगहों पर जमीन से जुड़े दस्तावेज, नकदी या अन्य कीमती सामान छिपा हो सकता है। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष सबूत सार्वजनिक नहीं किया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस 7 सर्कुलर रोड आवास में रह रहे हैं, वह पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते नहीं बल्कि उन्हें मिली उच्च सुरक्षा व्यवस्था के कारण है। जेडीयू का कहना है कि दोनों मामलों की तुलना करना उचित नहीं है।
RJD ने आरोपों को बताया राजनीतिक एजेंडा
जेडीयू के आरोपों पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील सिंह ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों और जनता से जुड़े अहम मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बंगले का विवाद खड़ा कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हाई कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया जा रहा है तो फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास में रहने को लेकर भी सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। आरजेडी नेताओं का आरोप है कि सत्ता पक्ष जानबूझकर राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। पार्टी का कहना है कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है, लेकिन सरकार आवास विवाद को सुर्खियों में बनाए रखना चाहती है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद आगे क्या होगा?
इस पूरे विवाद के केंद्र में हाई कोर्ट का वह आदेश है जिसमें कहा गया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को स्थायी रूप से सरकारी बंगला उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। इसी आधार पर राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड खाली करने का नोटिस दिया गया है और उनके लिए नया आवास भी आवंटित किया जा चुका है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लालू परिवार कब तक इस बंगले को खाली करता है और सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है। वहीं जेडीयू के ताजा आरोपों ने इस विवाद को केवल आवास तक सीमित नहीं रहने दिया है, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप दे दिया है। आने वाले दिनों में यदि इस मामले को लेकर कोई जांच या प्रशासनिक कार्रवाई होती है तो बिहार की राजनीति में इसका असर और अधिक देखने को मिल सकता है। फिलहाल बंगला विवाद, राजनीतिक बयानबाजी और कथित रहस्यों के दावों के बीच यह मुद्दा राज्य की सबसे चर्चित सियासी बहसों में शामिल हो गया है।
