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TMC में बढ़ा सियासी घमासान! Mamata Banerjee ने चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी, आखिर किस बात पर जताई नाराजगी?

TMC प्रमुख Mamata Banerjee ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर प्रतिद्वंद्वी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को और समय न देने की मांग की है। जानिए क्या है पूरा विवाद और क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल।

Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने आयोग से कहा है कि पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को जवाब देने के लिए और समय नहीं दिया जाना चाहिए। ममता बनर्जी का कहना है कि तय समय सीमा बीतने के बाद भी दूसरी ओर से कोई जवाब नहीं आया है। ऐसे में अब मामले पर जल्द फैसला लिया जाना चाहिए। इस चिट्ठी के बाद टीएमसी के अंदर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

 कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

टीएमसी के भीतर यह विवाद तब सामने आया जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले एक गुट ने खुद को पार्टी का असली प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया। इस गुट का दावा है कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव किए गए हैं और उन्हें मान्यता दी जानी चाहिए। बताया गया कि जून में हुए एक विशेष अधिवेशन के बाद इस संबंध में चुनाव आयोग को जानकारी दी गई थी। इसके बाद मामला चुनाव आयोग के पास पहुंचा और दोनों पक्षों से अपनी-अपनी बात रखने को कहा गया। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

आयोग ने मांगा था दोनों पक्षों से जवाब

मामले को देखते हुए चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों पक्षों को नोटिस भेजा था। आयोग ने दोनों गुटों से अपने दावों के समर्थन में जवाब दाखिल करने को कहा था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने तय समय के भीतर अपना जवाब जमा कर दिया। वहीं दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के गुट को भी एक निश्चित तारीख तक जवाब देने का समय दिया गया था। आयोग ने यह भी निर्देश दिया था कि दोनों पक्ष अपने जवाब की प्रति एक-दूसरे को भी उपलब्ध कराएं। लेकिन ममता बनर्जी का आरोप है कि तय समय गुजरने के बाद भी उन्हें दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है।

ममता ने जल्द कार्रवाई की मांग की

अपने पत्र में ममता बनर्जी ने कहा कि जवाब जमा करने की अंतिम तारीख निकलने के बाद भी काफी समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि उनके द्वारा जमा किए गए जवाब पर जल्द विचार किया जाए और दूसरे पक्ष को अतिरिक्त समय न दिया जाए। ममता का कहना है कि मामले को लंबा खींचने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। अब सभी की नजर चुनाव आयोग पर है कि वह इस विवाद में आगे क्या कदम उठाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आयोग का फैसला टीएमसी की अंदरूनी राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और सियासी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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