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ममता के लॉकडाउन बयान पर संजय राउत ने दिया चौंकाने वाला रिएक्शन, क्या पीएम मोदी फिर लगा सकते हैं नया लॉकडाउन?

संजय राउत ने ममता बनर्जी के लॉकडाउन बयान पर दिया चौंकाने वाला बयान, हरदीप पुरी ने अफवाहों को खारिज किया। जानें पेट्रोल-डीजल संकट और केंद्र की प्रतिक्रिया।

Sanjay Raut

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लॉकडाउन वाले बयान पर शिवसेना उद्धव गुट के सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है। राउत ने कहा कि बात में दम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस तरह पेट्रोल, डीजल और किरोसिन की बड़ी कतारें लगी हैं और सरकार में लगातार हलचल हो रही है, उससे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10–15 दिनों के लिए डीजल-पेट्रोल बचाने के मकसद से फिर लॉकडाउन लगा सकते हैं। राउत की यह टिप्पणी सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

लॉकडाउन की खबरों को बताया पूरी तरह गलत

हालांकि, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने शुक्रवार, 27 मार्च को साफ किया कि लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह अफवाह हैं। उन्होंने ट्वीट किया, “लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहें पूरी तरह गलत हैं। सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे समय में ज़रूरी है कि हम सभी शांत, ज़िम्मेदार और एकजुट रहें।” हरदीप पुरी के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि फिलहाल केंद्र सरकार के पास ऐसा कोई योजना या प्रस्ताव नहीं है।

संसद में पीएम मोदी के बाद राउत की आलोचना

मिडिल ईस्ट में जंग के बीच, उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने पहले भी केंद्र को घेरा था। उन्होंने कहा कि युद्ध के 25 दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में संबोधन दिया, और उनकी बॉडी लैंग्वेज देखकर ऐसा लगा कि पीएम मोदी डिप्रेशन में हैं और नियंत्रण खो चुके हैं। राउत ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की मानसिकता में लंबे समय तक सत्ता बनाए रखने का इरादा स्पष्ट नहीं दिखता। राउत की यह टिप्पणी राजनीतिक समीक्षकों और विपक्षी दलों के लिए महत्वपूर्ण बन गई है।

जनता और मीडिया में उभरे सवाल

हालांकि केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने अफवाहों को खारिज किया है, लेकिन ममता बनर्जी और संजय राउत के बयान ने जनता और मीडिया में सवाल खड़ा कर दिया है। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें और लंबी कतारें आम नागरिकों के लिए चिंता का कारण हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार को इस समय आर्थिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में सावधानी बरतनी होगी। अफवाहों और बयानबाजी के बीच, जनता की निगाहें सरकार पर टिकी हुई हैं कि वह वास्तविक नियंत्रण और स्थिरता कैसे बनाए रखेगी।

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