भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए उनके इस्तीफा न देने के बयान को लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव परिणामों के बाद भी कोई नेता पद छोड़ने से इनकार करता है, तो यह जनता के फैसले का सीधा अपमान है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और उसका सम्मान हर परिस्थिति में किया जाना चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
‘अराजकता फैलाने का आरोप’
जगदंबिका पाल ने ममता बनर्जी पर राज्य में अराजकता का माहौल बनाने और सत्ता से चिपके रहने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि सरकार का दायित्व जनता की सेवा करना होता है, लेकिन अगर सत्ता बनाए रखने के लिए गलत संदेश दिया जाए तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक घटनाक्रम चिंता पैदा करने वाले हैं और प्रशासनिक संतुलन पर सवाल खड़े करते हैं।
आज लखनऊ स्थित आवास पर ANI न्यूज़ एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि यदि ममता बनर्जी इस्तीफा न देने की बात कह रही हैं, तो यह पश्चिम बंगाल की जनता के जनादेश का अपमान है।
लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। 🇮🇳 pic.twitter.com/lwyRNwcw7j— Jagdambika Pal (@jagdambikapalmp) May 6, 2026
चर्चा में जगदंबिका पाल का बयान
इससे पहले भी भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने ममता बनर्जी के राजनीतिक दावों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” तक कह दिया था। यह बयान भी काफी चर्चा में रहा था और राजनीतिक विरोधियों ने इसे असंवेदनशील बताया था। वहीं, पाल का कहना है कि सत्ता में बने रहने की इच्छाओं को जनता के फैसले से ऊपर नहीं रखा जा सकता और हर नेता को जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए जगदंबिका पाल ने दोहराया कि अगर कोई नेता चुनावी हार के बाद भी इस्तीफा न देने की बात करता है, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और उसका सम्मान करना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है और सत्ताधारी व विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं।
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