पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। Mehbooba Mufti ने भारतीय जनता पार्टी की जीत पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे केवल राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हैं। मुफ्ती के मुताबिक, जिस तरह से परिणाम सामने आए हैं, वह कई मायनों में “चौंकाने वाले और परेशान करने वाले” हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर निशाना
मुफ्ती ने Election Commission of India की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत का चुनाव आयोग दुनिया में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए मिसाल माना जाता था, खासकर T. N. Seshan के कार्यकाल के दौरान। लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर चुनावों को प्रभावित किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
India was once admired as a global model for free and fair elections especially after T. N. Seshan transformed ECI into a fearless guardian of democracy. Today, that very institution stands accused of subverting the electoral process, aided by central agencies.
A tragic fall. We…— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) May 5, 2026
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
People’s Democratic Party की अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि Enforcement Directorate और Central Bureau of Investigation जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, इन संस्थाओं के जरिए राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाया जाता है, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित होता है। मुफ्ती ने यह भी कहा कि मीडिया और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाएं भी इस दबाव से अछूती नहीं हैं।
बंगाल की जीत और विपक्ष की प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 294 में से 206 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वहीं Mamata Banerjee ने भी चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए करीब 100 सीटों पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। Rahul Gandhi ने भी इन आरोपों का समर्थन किया है। ऐसे में बंगाल के नतीजे अब केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुके हैं, जिसमें पारदर्शिता और निष्पक्षता जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
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