आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था FATF में भारत की भूमिका और मजबूत हुई है। भारतीय अधिकारी विवेक अग्रवाल को FATF का उपाध्यक्ष चुना गया है। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं। इसे भारत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विवेक अग्रवाल पहले FATF में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वह वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) के निदेशक के रूप में भी काम कर चुके हैं। भारत लंबे समय से दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है।
ओवैसी ने पाकिस्तान पर सख्ती की मांग की
AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने विवेक अग्रवाल की नियुक्ति का स्वागत किया है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल कराने की मांग की है। ओवैसी ने कहा कि भारत को FATF में अपनी मजबूत स्थिति का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान समर्थित संगठन टीआरएफ (TRF) को संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादी सूची में शामिल कराने के लिए सरकार को कोशिश करनी चाहिए।
Vivek Agarwal is the first Indian to have been elected Vice President of FATF,what @narendramodi government must do is to bring back Pakistan in Grey List.
USA list of TRF is of no real use,UN listing is needed of TRF,Modi government should have & must have tried to list ISI also…— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) June 20, 2026
क्या होती है FATF की ग्रे लिस्ट?
FATF उन देशों पर नजर रखता है, जहां मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को आर्थिक मदद मिलने का खतरा होता है। अगर किसी देश को FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जाता है, तो उसे दुनिया के सामने अपनी वित्तीय व्यवस्था सुधारने के लिए कदम उठाने पड़ते हैं। ग्रे लिस्ट में आने के बाद उस देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज लेने में मुश्किल हो सकती है। International Monetary Fund, World Bank और Asian Development Bank जैसी संस्थाएं कर्ज देने के लिए सख्त शर्तें लगा सकती हैं। इससे विदेशी निवेश भी प्रभावित हो सकता है।
पहले भी ग्रे लिस्ट में रह चुका है पाकिस्तान
पाकिस्तान जून 2018 से अक्टूबर 2022 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा था। उस दौरान पाकिस्तान पर आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए कई कदम उठाने का दबाव था। हालांकि, किसी देश को ग्रे लिस्ट में डालने का फैसला FATF के सभी सदस्य देशों की सहमति से होता है। यह फैसला तय नियमों और जांच के आधार पर लिया जाता है। ऐसे में भारत के उपाध्यक्ष बनने के बाद पाकिस्तान पर नजर जरूर बढ़ सकती है, लेकिन अंतिम फैसला FATF की सामूहिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
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