Home राजनीति सदन में आखिर क्यों भिड़ गए अखिलेश और केसी वेणुगोपाल? विपक्ष की...

सदन में आखिर क्यों भिड़ गए अखिलेश और केसी वेणुगोपाल? विपक्ष की एकता पर उठे सवाल, अंदर क्या हुआ जानिए

लोकसभा में NEET मुद्दे पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के बीच बोलने के क्रम को लेकर मतभेद सामने आए। जानिए सदन में क्या हुआ और क्यों बढ़ी विपक्ष के भीतर नाराजगी।

अखिलेश और केसी वेणुगोपाल

लोकसभा में NEET परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। सड़क पर एकजुट नजर आने वाले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सदन के अंदर बोलने के अधिकार को लेकर तनाव देखने को मिला। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सांसद सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और छात्रों के मुद्दे पर अपनी बात रखने की मांग कर रहे थे। इसी दौरान जब लोकसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल को बोलने का अवसर दिया, तो समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्रों का है, इसलिए सभी विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने अध्यक्ष से सवाल किया कि क्या केवल कुछ दलों को ही बोलने का मौका देने के पीछे कोई विशेष कारण है।

बोलने के अधिकार को लेकर बढ़ी नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने उनसे इस बयान पर सवाल किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी की ओर से यह कहा गया कि फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा छात्रों को न्याय दिलाना और उनके साथ हुई कथित कार्रवाई पर जवाब मांगना है। वहीं कांग्रेस का मानना था कि संसद के भीतर विपक्ष की रणनीति तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़नी चाहिए। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से इस बहस को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सदन के भीतर हुई इस नोकझोंक की चर्चा पूरे दिन राजनीतिक गलियारों में होती रही।

छात्रों के मुद्दे को राजनीति से ऊपर रखने की अपील

लोकसभा में अपनी बात रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि NEET और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल का नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्र बेहतर शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की उम्मीद रखते हैं, इसलिए इस विषय पर सभी दलों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों के साथ सख्ती उचित नहीं है। उनका कहना था कि यदि छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो विपक्ष उनके समर्थन में आगे भी आवाज उठाता रहेगा। अखिलेश ने यह भी कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से बड़ा विषय है।

विपक्ष की रणनीति पर फिर शुरू हुई चर्चा

संसद के भीतर हुई इस घटना के बाद विपक्षी एकता को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष एक मंच पर दिखाई देता है, लेकिन सदन के भीतर नेतृत्व, बोलने के क्रम और रणनीति को लेकर अलग-अलग दलों की अपनी प्राथमिकताएं सामने आ जाती हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के हितों की बात कर रहे हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने यह संकेत जरूर दिया है कि विपक्ष के भीतर समन्वय बनाए रखना आसान नहीं है। अब आने वाले दिनों में संसद के भीतर इन दलों की संयुक्त रणनीति कैसी रहती है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

Read More-दिल्ली के बाद अब पटना की सड़कों पर संग्राम: क्या राजभवन घेरने निकले छात्रों को रोक पाएगी पुलिस?

Exit mobile version