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UP चुनाव से पहले लखनऊ में दिखा BJP का शक्ति प्रदर्शन, एक तस्वीर ने बदल दिया सियासी माहौल… सपा के दावे पर उठे सवाल

UP राज्यसभा चुनाव के नामांकन में बीजेपी और उसके सहयोगियों की एकजुटता ने सियासी चर्चाएं तेज कर दी हैं। जानिए लखनऊ में सामने आई तस्वीर से सपा के तीसरे उम्मीदवार वाले दावे पर क्या असर पड़ा।

BJP

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर मंगलवार को लखनऊ में सियासी हलचल तेज रही। BJP के आठ उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान अपना दल (सोनेलाल) के नेता और योगी सरकार में मंत्री आशीष पटेल तथा निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद भी बीजेपी प्रत्याशियों के साथ नजर आए। नामांकन के दौरान सामने आई तस्वीरों और वीडियो को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया। बीजेपी खेमे की यह एकजुटता इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि समाजवादी पार्टी लगातार बीजेपी और उसके सहयोगी दलों में सेंध लगाने की संभावना जता रही थी।

अखिलेश यादव के तीसरे उम्मीदवार वाले दांव पर लगा ब्रेक?

दरअसल, राज्यसभा चुनाव में सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने की अटकलें चल रही थीं। माना जा रहा था कि अगर सपा तीसरा प्रत्याशी मैदान में उतारती है तो वह बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के कुछ विधायकों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर सकती है। अखिलेश यादव ने सपा के उन नेताओं के लिए भी दरवाजा खुला रखने की बात कही थी, जो पार्टी छोड़कर दूसरी तरफ चले गए हैं। लेकिन नामांकन के दिन सपा के बागी माने जाने वाले अभय सिंह और राकेश सिंह बीजेपी खेमे के साथ दिखाई दिए। इससे सियासी चर्चाओं को और हवा मिल गई। इससे पहले सपा के एक अन्य बागी नेता विनोद चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात की थी।

बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारे, जातीय समीकरण पर भी फोकस

BJP की ओर से राज्यसभा के लिए घोषित आठ उम्मीदवारों में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई दी। इनमें मंत्री धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडे और राम प्रताप सिंह चौहान शामिल हैं। इनमें दो महिला उम्मीदवार भी हैं। पार्टी ने ओबीसी, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्ग से जुड़े चेहरों को मौका देकर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है। सभी उम्मीदवारों ने नामांकन के दो-दो सेट जमा किए, जिनमें 10-10 विधायकों के प्रस्तावक हस्ताक्षर बताए गए हैं।

‘अब तीन नहीं, 403 पर ध्यान’, अखिलेश के बयान से साफ हुआ रुख

सपा की तरफ से राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं। तीसरे उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों के बीच अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘अब हमारा ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है।’ उनके इस बयान को तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की हार मानने से जोड़ दिया। अगर अंतिम समय में कोई बदलाव नहीं हुआ तो राज्यसभा की 10 सीटों पर सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है। अब बीजेपी की नजर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर है।

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