उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी ने 1 अक्टूबर को लखनऊ में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह बैठक सपा कार्यालय स्थित जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में हुई और करीब डेढ़ घंटे तक चली। मुलाकात के बाद अब्बास के राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सुभासपा फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा है।
राज्यसभा चुनाव ने बढ़ाई विधायकों की अहमियत
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है और इसी वजह से विधानसभा में विधायकों के समर्थन को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय हैं। समाजवादी पार्टी ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं और तीसरी सीट के लिए भी संख्या जुटाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक तीसरी सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोटों का आंकड़ा महत्वपूर्ण है। ऐसे में एनडीए के सहयोगी दलों के विधायकों पर भी राजनीतिक नजरें हैं। इसी बीच अखिलेश यादव ने दावा किया है कि कई लोग उनकी पार्टी के संपर्क में हैं और जल्द ही तीसरे उम्मीदवार के लिए जरूरी संख्या पूरी होने की बात कही है।
सुभासपा के 6 विधायक, किन नामों पर चर्चा?
सुभासपा के विधानसभा में छह विधायक हैं। अब्बास अंसारी की अखिलेश से मुलाकात के बाद पार्टी के कुछ अन्य विधायकों को लेकर भी तरह-तरह के दावे सामने आ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में जगदीश नारायण और हंसु राम समेत अन्य विधायकों के सपा के संपर्क में होने की चर्चा है। वहीं सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अलग-अलग मौकों पर अपने विधायकों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। इसलिए फिलहाल इसे सुभासपा में औपचारिक टूट कहना सही नहीं होगा। किसी विधायक के पाला बदलने या सपा में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।
RLD विधायकों को लेकर भी अटकलें
सियासी चर्चाओं का दायरा केवल सुभासपा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा चुनाव से पहले एनडीए से जुड़े दूसरे विधायकों को लेकर भी सपा के संपर्क के दावे सामने आ रहे हैं। अखिलेश यादव ने खुद कहा है कि कई लोग संपर्क में हैं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी को पार्टी में समायोजित करना आसान नहीं है। ऐसे में अब्बास अंसारी की मुलाकात को राज्यसभा चुनाव के मौजूदा राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। अब असली तस्वीर तब साफ होगी, जब उम्मीदवारों और विधायकों के रुख को लेकर आधिकारिक घोषणाएं सामने आएंगी।
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