देश की संसद में लगातार सक्रिय भूमिका निभाने वाले 12 सांसदों को इस साल प्रतिष्ठित ‘संसद रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। इस बार जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनमें कई अनुभवी और चर्चित चेहरे शामिल हैं। निजी संस्था ‘प्राइम पॉइंट फाउंडेशन’ ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि बीजेपी सांसद Jagdambika Pal, Nishikant Dubey, P. P. Chaudhary और शिवसेना सांसद Shrikant Eknath Shinde को व्यक्तिगत श्रेणी में चुना गया है। संसद में सवाल पूछने, बहस में भाग लेने और विधायी कामकाज में सक्रिय योगदान के आधार पर इन सांसदों का चयन किया गया है। इस घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि सूची में कई ऐसे नेता शामिल हैं जो लंबे समय से संसदीय राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं।
उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र तक कई सांसदों को मिला मौका
इस बार संसद रत्न पुरस्कार की सूची में अलग-अलग राज्यों के सांसदों को जगह दी गई है। उत्तर प्रदेश से प्रवीण पटेल और जगदंबिका पाल को सम्मान मिलेगा, जबकि झारखंड से विद्युत बरन महतो और निशिकांत दुबे का नाम शामिल है। राजस्थान से पीपी चौधरी और लुम्बाराम चौधरी को चुना गया है। महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा नाम सामने आए हैं, जिनमें हेमंत विष्णु सवरा, स्मिता उदय वाघ, नरेश गणपत म्हस्के, मेधा विश्राम कुलकर्णी और श्रीकांत एकनाथ शिंदे शामिल हैं। गुजरात से नरहरि अमीन को भी इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है। खास बात यह है कि इन नेताओं को संसद के बजट सत्र तक के प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार उन सांसदों के लिए प्रेरणा माना जाता है जो संसद में केवल उपस्थिति ही नहीं बल्कि गंभीर चर्चा और जनहित के मुद्दों को उठाने में भी आगे रहते हैं।
चार संसदीय समितियों ने भी बनाया खास रिकॉर्ड
इस साल केवल सांसद ही नहीं बल्कि चार संसदीय समितियों को भी उनके शानदार कामकाज के लिए सम्मानित किया जाएगा। इनमें कृषि समिति, वित्त समिति, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति और कोयला एवं खान समिति शामिल हैं। कृषि समिति की अध्यक्षता Charanjit Singh Channi कर रहे हैं, जबकि वित्त समिति की जिम्मेदारी Bhartruhari Mahtab के पास है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति का नेतृत्व सप्तगिरि शंकर उलाका कर रहे हैं और कोयला एवं खान समिति की कमान Anurag Thakur के हाथों में है। इन समितियों ने संसद में विभिन्न मुद्दों पर रिपोर्ट तैयार करने, नीतियों की समीक्षा करने और सरकार को सुझाव देने में अहम भूमिका निभाई है। यही वजह है कि इस बार समितियों के प्रदर्शन को भी अलग पहचान दी गई है।
2010 में हुई थी शुरुआत, लोकतंत्र को मजबूत करने की पहल
संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत साल 2010 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन सांसदों को सम्मानित करना है जो संसद में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यह पुरस्कार सांसदों की संसद में मौजूदगी, बहस में भागीदारी, प्रश्न पूछने और विधायी कार्यों में योगदान के आधार पर दिया जाता है। समय के साथ यह सम्मान काफी प्रतिष्ठित बन चुका है और अब इसे संसदीय प्रदर्शन का बड़ा पैमाना माना जाता है। इस बार की सूची में कई ऐसे नेता शामिल हैं जिन्होंने राज्य और केंद्र की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जगदंबिका पाल और चरणजीत सिंह चन्नी जैसे नेता पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि नरहरि अमीन गुजरात के उपमुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में इस साल का संसद रत्न पुरस्कार केवल सम्मान नहीं बल्कि संसद में सक्रिय और जिम्मेदार राजनीति की पहचान भी बन गया है।
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