मिडिल ईस्ट में ईरान पर हुए ताजा हमलों के बाद सोमवार सुबह भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। बाजार खुलने से पहले प्री-ओपन सेशन में सेंसेक्स करीब 7000 अंक तक टूटता दिखा, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई। हालांकि बाजार खुलने के बाद कुछ संभलाव भी देखा गया, लेकिन शुरुआती संकेतों ने साफ कर दिया कि वैश्विक तनाव का असर भारतीय बाजार पर सीधा पड़ा है। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया। बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट सिर्फ आर्थिक कारणों से नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक डर के कारण हुई है। जब भी दुनिया के किसी बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देता है।
कच्चे तेल में 10% उछाल, महंगाई का खतरा
ईरान पर हमले की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10% तक की तेजी दर्ज की गई। इसका सबसे बड़ा कारण सप्लाई को लेकर बढ़ी अनिश्चितता है। अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा चलता है या होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में तेजी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। इससे महंगाई दर में इजाफा होने की आशंका है। सरकार के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि तेल आयात बिल बढ़ने से वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा।
निवेशकों में डर, सुरक्षित विकल्पों की ओर रुझान
शेयर बाजार में गिरावट के साथ ही निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ गया है। सोने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, क्योंकि संकट के समय निवेशक सोने को सुरक्षित मानते हैं। डॉलर मजबूत हुआ है और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। भारतीय रुपया भी दबाव में आ सकता है, जिससे आयात महंगा होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार फिलहाल ‘डर के माहौल’ में काम कर रहा है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात जल्द काबू में आ जाते हैं तो बाजार में रिकवरी भी हो सकती है। लेकिन अगर तनाव और बढ़ता है, तो निवेशकों को और झटका लग सकता है। छोटे निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराकर फैसले न लें और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान दें।
आगे क्या? सरकार और बाजार की नजर हालात पर
अब सबकी नजर इस बात पर है कि मिडिल ईस्ट में हालात किस दिशा में जाते हैं। अगर तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर और गहरा होगा। भारत जैसे देशों को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग करने पर विचार करना पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक हालात पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर बाजार को स्थिर रखने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल यह साफ है कि ईरान पर हुए हमलों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। निवेशकों और आम जनता के लिए यह समय सतर्क रहने का है।
