मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान की लेबर न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त एयरस्ट्राइक में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की मौत हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के पूर्वोत्तर इलाके नरमक में स्थित उनके आवास को निशाना बनाया गया। इस हमले में उनके साथ कई बॉडीगार्ड के भी मारे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस खबर की आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, जिससे स्थिति और अधिक रहस्यमयी बनी हुई है।
अहमदीनेजाद 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे थे और अपने कड़े पश्चिम विरोधी रुख के लिए जाने जाते थे। राष्ट्रपति बनने से पहले वे अर्दबिल प्रांत के गवर्नर और तेहरान के मेयर भी रह चुके थे। उन्होंने कई बार इजरायल के अस्तित्व को नकारते हुए विवादित बयान दिए थे, जिससे वे वैश्विक राजनीति में अक्सर चर्चा का विषय बने रहते थे। ऐसे में उनकी कथित मौत की खबर ने ईरान समेत पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है।
खामेनेई के बाद एक और बड़ा झटका?
इस घटनाक्रम से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर ने ही पश्चिम एशिया की राजनीति को हिला दिया था। 36 वर्षों तक सत्ता पर मजबूत पकड़ रखने वाले खामेनेई को ईरान की राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। वे अयातुल्ला रूहोल्ला खोमैनी के उत्तराधिकारी थे, जिन्होंने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में इस्लामी गणराज्य की स्थापना की थी।
खामेनेई की मौत के बाद देश में नई नेतृत्व परिषद के गठन की बात सामने आई है। ईरान के मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बयान जारी कर कहा है कि देश का नेतृत्व स्थिर है और किसी भी बाहरी हमले का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का जवाब ईरान लगातार देता रहेगा। ऐसे में अहमदीनेजाद की कथित मौत की खबर ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है।
क्या बढ़ेगा युद्ध का दायरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह खबर सही साबित होती है तो यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है। अमेरिका और इजरायल की ओर से अब तक इस हमले को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। वहीं ईरान में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर बताई जा रही हैं। तेहरान और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अहमदीनेजाद भले ही सत्ता में नहीं थे, लेकिन कट्टर राष्ट्रवादी धड़े में उनका प्रभाव अब भी था। उनकी मौत की खबर ईरान के भीतर कट्टरपंथी गुटों को और आक्रामक बना सकती है। इससे क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है। मिडिल ईस्ट पहले से ही अस्थिर हालात से गुजर रहा है और ऐसे में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में बड़े सैन्य टकराव की भूमिका तैयार कर सकता है।
भारत में भी दिखा असर, कई शहरों में प्रदर्शन
खामेनेई की मौत के बाद भारत के कई हिस्सों में शिया समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किए। कश्मीर से लेकर कर्नाटक तक कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। नई दिल्ली, बिहार, झारखंड और तेलंगाना में भी लोगों ने पोस्टर और बैनर लेकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मिडिल ईस्ट में हो रही घटनाएं केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक असर डालने वाली हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान आधिकारिक तौर पर अहमदीनेजाद की मौत की पुष्टि करेगा या यह केवल युद्धकालीन दावों और प्रचार का हिस्सा है। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।