भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन अधिसूचित किया है। इससे 100 प्रतिशत इथेनॉल यानी E100 ईंधन पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले के बाद ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल से जुड़ा नियामकीय ढांचा आगे बढ़ेगा। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अब हर पेट्रोल कार में E100 डलवाया जा सकेगा। ईंधन के प्रकार के साथ वाहन की तकनीकी क्षमता और प्रमाणन भी महत्वपूर्ण होंगे।
क्या आपकी पेट्रोल कार में डल सकेगा E100?
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल वाले ईंधन का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें इस तरह के फ्यूल के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया है। इसका मतलब है कि सामान्य पेट्रोल कारों और E20 के लिए तैयार वाहनों में E85 या E100 का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जब तक निर्माता ने इसकी स्पष्ट अनुमति न दी हो। E85 में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि E100 में इथेनॉल की मात्रा 100 प्रतिशत होती है। अधिक इथेनॉल वाले ईंधन के लिए इंजन और ईंधन प्रणाली में विशेष तकनीकी बदलाव जरूरी हो सकते हैं। इसलिए वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की पुस्तिका और निर्माता के निर्देश देखकर ही ईंधन चुनना चाहिए।
वजन सीमा में भी बदलाव, हल्के वाहनों को क्या फायदा?
नियमों में संशोधन के तहत वाहन वर्गीकरण, ईंधन के तकनीकी मानकों और उत्सर्जन जांच से जुड़े कुछ प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, प्रभावित हल्के पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए वजन की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम की गई है। इन बदलावों का उद्देश्य वाहन नियमों को नए ईंधन विकल्पों और तकनीकी विकास के अनुरूप बनाना है। हालांकि, इस बदलाव का लाभ किस श्रेणी के वाहनों को मिलेगा, यह संबंधित नियमों और वाहन के वर्गीकरण पर निर्भर करेगा। इसलिए इसे हर कार के लिए लागू होने वाला सामान्य बदलाव नहीं समझना चाहिए।
E20 के बाद E100 पर जोर, कंपनियां भी कर रहीं तैयारी
भारत सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को बढ़ावा दे रही है, ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सके। E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इसके आगे फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक ऐसे वाहनों का विकल्प देती है, जिन्हें अलग-अलग अनुपात वाले इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलाया जा सकता है। मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कंपनियां भी वैकल्पिक ईंधन तकनीकों पर काम कर रही हैं। इसके अलावा, मोटर वाहन नियमों में B100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी मिश्रित ईंधन जैसे विकल्पों को शामिल करने की दिशा में भी पहल की गई है। आने वाले समय में इन तकनीकों का विस्तार इस बात पर निर्भर करेगा कि वाहन उपलब्धता, ईंधन ढांचा और सुरक्षा मानक किस तरह विकसित होते हैं।
