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टीम इंडिया की ट्रॉफी मंदिर पहुंची तो भड़के तारिक अनवर! कीर्ति आजाद के बाद दिया बड़ा बयान, बोले— खेल का कोई धर्म नहीं

Team India की जीत के बाद ट्रॉफी मंदिर ले जाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। टीएमसी सांसद तारिक अनवर ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खेल का कोई धर्म नहीं होता। इससे पहले 1983 वर्ल्ड कप विजेता कीर्ति आजाद भी इस मुद्दे पर सवाल उठा चुके हैं।

Team India

टीम इंडिया की बड़ी जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है, लेकिन इसी जश्न के बीच अब एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। दरअसल, जीत के बाद ट्रॉफी को मंदिर ले जाने की खबर सामने आने के बाद कई राजनीतिक नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद Tariq Anwar ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है और इसमें अलग-अलग धर्मों के खिलाड़ी शामिल होते हैं, इसलिए खेल को किसी एक धर्म से जोड़ना उचित नहीं है। उनका कहना है कि खेल का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होता है, इसलिए जश्न मनाने के तरीके भी ऐसे होने चाहिए जो सभी को साथ लेकर चलें। इसी मुद्दे पर 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य Kirti Azad ने भी पहले नाराजगी जताई थी, जिसके बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

तारिक अनवर का बयान बना चर्चा का केंद्र

इस पूरे विवाद में तारिक अनवर का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने कहा कि भारत एक विविधताओं वाला देश है और यहां हर धर्म और समुदाय के लोग रहते हैं। ऐसे में जब टीम इंडिया कोई बड़ी जीत हासिल करती है तो वह पूरे देश की जीत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि खेल को हमेशा राजनीति और धर्म से ऊपर रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत आस्था है तो वह निजी तौर पर पूजा कर सकता है, लेकिन टीम की जीत को किसी एक धार्मिक पहचान से जोड़ना ठीक संदेश नहीं देता। तारिक अनवर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई और कई लोग इस पर अपनी राय देने लगे। वहीं इस मुद्दे को लेकर कीर्ति आजाद के पुराने बयान को भी फिर से चर्चा में लाया जा रहा है।

कीर्ति आजाद के बयान ने भी बढ़ाई बहस

इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पूर्व क्रिकेटर और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर सवाल उठाया। कीर्ति आजाद ने कहा था कि खेल का कोई धर्म नहीं होता और टीम इंडिया की जीत पूरे देश की जीत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब 1983 में भारत ने विश्व कप जीता था, तब उस जीत को पूरे देश के जश्न के रूप में देखा गया था और उसे किसी धार्मिक पहचान से नहीं जोड़ा गया था। कीर्ति आजाद के इस बयान के बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया। अब तारिक अनवर ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि खेल को धर्म से जोड़ना सही नहीं है और इससे गलत संदेश जा सकता है।

सोशल मीडिया से राजनीति तक बढ़ी बहस

टीम इंडिया की जीत पर शुरू हुआ यह विवाद अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक पहुंच गया है। कुछ लोग तारिक अनवर और कीर्ति आजाद के बयान का समर्थन करते हुए कह रहे हैं कि खेल को धर्म से अलग रखना चाहिए। वहीं दूसरी ओर कई लोग यह भी मानते हैं कि खिलाड़ियों की निजी आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। फिलहाल टीम इंडिया की शानदार जीत के बीच यह मुद्दा नई बहस को जन्म दे चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले पर अन्य राजनीतिक दलों और खेल जगत की ओर से कैसी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।

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