भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच और पूर्व सांसद गौतम गंभीर ने अपनी पहचान के गलत इस्तेमाल को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने Delhi High Court में एक सिविल मुकदमा दायर कर आरोप लगाया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनके नाम, चेहरे और आवाज का गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है। गंभीर का कहना है कि बिना उनकी अनुमति के कई वीडियो और पोस्ट बनाए जा रहे हैं, जिससे उनकी छवि और विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है।
डीपफेक और AI वीडियो ने बढ़ाई परेशानी
गंभीर की याचिका में कहा गया है कि हाल के महीनों में उनके नाम से कई डीपफेक वीडियो वायरल हुए हैं। इन वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर ऐसा दिखाया जाता है जैसे वे खुद बयान दे रहे हों, जबकि असल में उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक फर्जी इस्तीफे वाला वीडियो लाखों बार देखा गया, वहीं एक अन्य वीडियो में उन्हें सीनियर खिलाड़ियों पर टिप्पणी करते हुए दिखाया गया। इन वायरल क्लिप्स ने न सिर्फ भ्रम फैलाया, बल्कि उनके सार्वजनिक छवि को भी प्रभावित किया।
बड़ी कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बनाया पक्षकार
इस मामले में गंभीर ने कई बड़ी कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी पक्षकार बनाया है। इनमें Google, Meta, Amazon, Flipkart और X जैसे नाम शामिल हैं। आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी कंटेंट और सामान बेचा जा रहा है। गंभीर ने अदालत से मांग की है कि बिना उनकी लिखित अनुमति के उनकी पहचान का किसी भी तरह उपयोग न किया जाए और ऐसे सभी कंटेंट को तुरंत हटाया जाए।
2.5 करोड़ हर्जाने की मांग, कहा—ये सिर्फ मेरा मामला नहीं
गौतम गंभीर ने इस मामले में करीब 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की है। उनके वकीलों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की छवि का सवाल नहीं, बल्कि डिजिटल युग में बढ़ते फेक कंटेंट और दुरुपयोग के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई है। गंभीर का मानना है कि इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा न हो। अब इस केस पर कोर्ट का फैसला काफी अहम माना जा रहा है, जो डीपफेक और AI तकनीक के गलत इस्तेमाल पर एक मिसाल बन सकता है।
