ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है। सरकार ने उनके अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी है। सबसे पहले राजधानी तेहरान में लोगों को अंतिम दर्शन का मौका दिया जाएगा। यहां बड़े स्तर पर श्रद्धांजलि सभा होगी, जिसमें लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर मशहद ले जाया जाएगा, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सरकार ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।
मशहद क्यों चुना गया?
मशहद ईरान का बहुत पवित्र शहर माना जाता है। यही खामेनेई का जन्मस्थान भी है। यहां इमाम रज़ा की दरगाह है, जो शिया मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत अहम है। बताया जा रहा है कि उन्हें इसी पवित्र स्थान के पास दफनाया जाएगा। उनके पिता भी यहीं दफन हैं। इस कारण परिवार और धार्मिक जुड़ाव को देखते हुए मशहद को चुना गया है। शहर में बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना है, इसलिए प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं।
तनाव के बीच बड़ा आयोजन
खामेनेई का निधन ऐसे समय हुआ है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। हालिया हमलों के बाद हालात पहले से ही गंभीर बने हुए हैं। ऐसे में उनका अंतिम संस्कार सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। कई देशों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं ताकि कोई गड़बड़ी न हो।
आगे क्या होगा?
उनके निधन के बाद ईरान में नए नेतृत्व को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। लोग सड़कों पर निकलकर शोक जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी याद में संदेश साझा किए जा रहे हैं। मशहद में दफन के बाद यह जगह उनके समर्थकों के लिए खास बन जाएगी। आने वाले समय में ईरान की राजनीति और विदेश नीति में बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस अंतिम संस्कार पर टिकी है।
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