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ट्रंप की योजना फेल? इजरायल ने साफ किया, कहा- ‘ईरान में हमारी सेना जमीनी ऑपरेशन नहीं…’

ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन में इजरायल ने अमेरिका को झटका दिया। नेतन्याहू बोले- ‘हमारी सेना ईरान में नहीं जाएगी’। पढ़िए पूरी खबर और अमेरिकी चुनौती।

US-Iran War

US-Iran War: मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेगा। इजरायल के इस फैसले ने अमेरिका के लिए योजना में बदलाव की आवश्यकता पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति ईरान में जमीनी अभियान पर आधारित थी, लेकिन नेतन्याहू की घोषणा ने अमेरिकी योजना को चुनौती दे दी है।

इजरायल ने बताया कि उनका ध्यान अपनी सीमाओं की सुरक्षा और दक्षिणी लेबनॉन में हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान पर केंद्रित रहेगा। इस वजह से ईरान में जमीनी ऑपरेशन में हिस्सा लेना फिलहाल संभव नहीं है। इजरायल के रक्षा अधिकारियों का कहना है कि वे अपने हवाई और समुद्री हमलों को जारी रखेंगे, लेकिन जमीनी सेना को वहां भेजना फिलहाल उनकी प्राथमिकता में नहीं है।

अमेरिका पर बढ़ा दबाव

अमेरिका के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। इजरायल की गैर-भागीदारी का मतलब है कि अमेरिकी सेना को ईरान में संभावित ग्राउंड ऑपरेशन को अकेले ही अंजाम देना होगा। अमेरिकी पेंटागन ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने 10,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं, जिनमें 2,500 मरीन पहले ही मध्य पूर्व पहुंच चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है तो यह अत्यंत जोखिम भरा हो सकता है। अमेरिकी सेना को वहां कई दिन या हफ्तों तक रहना पड़ सकता है। तकनीकी सहयोग और खुफिया जानकारी की मदद संभव है, लेकिन जमीनी लड़ाई का बोझ पूरी तरह अमेरिका पर ही रहेगा। इससे अमेरिका की रणनीति और उसके सैनिकों की सुरक्षा दोनों पर बड़ा असर पड़ेगा।

नेतन्याहू का स्पष्ट रुख

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका को यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सेना ईरान में नहीं जाएगी। नेतन्याहू का कहना है कि उनका ध्यान देश की सीमाओं की सुरक्षा पर है और फिलहाल ईरान में जमीनी ऑपरेशन उनकी प्राथमिकता नहीं है। इजरायल की यह नीति अमेरिका के लिए अप्रत्याशित है, क्योंकि अमेरिकी योजना को इस कदम से पूरी तरह से पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

इजरायल के इस फैसले का कारण दक्षिणी लेबनॉन में हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान को प्राथमिकता देना और अपनी सीमाओं की सुरक्षा बनाए रखना बताया गया है। नेतन्याहू ने साफ किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही कदम उठाएगा। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, इजरायल की यह नीति ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक और रणनीतिक झटका साबित हो सकती है।

ट्रंप का अगला कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अब यह चुनौती है कि वे ग्राउंड ऑपरेशन को लेकर आगे क्या निर्णय लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मिशन की जटिलता और जोखिम को देखते हुए ट्रंप को रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप अमेरिकी सेना के संभावित जोखिमों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर यह ऑपरेशन शुरू करने को तैयार हैं।

मिडिल ईस्ट में बढ़ती अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और वॉशिंगटन-पेंटागन की तैयारी इस बात की ओर संकेत कर रही है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि इजरायल की गैर-भागीदारी ने अमेरिका पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका अब अकेले ही जमीनी ऑपरेशन के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इस स्थिति में अमेरिका की रणनीति, सैनिकों की सुरक्षा और ऑपरेशन की सफलता सभी सवालों के घेरे में हैं।

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