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‘मंडप तैयार, पर बारात गायब!’—इस्लामाबाद में हाई अलर्ट के बीच US-ईरान वार्ता पर सस्पेंस बरकरार

इस्लामाबाद में US-ईरान वार्ता को लेकर सस्पेंस बरकरार। भारी सुरक्षा और हाई-प्रोफाइल तैयारियों के बीच अब तक साफ नहीं कि बैठक होगी या नहीं।

इस्लामाबाद

पाकिस्तान की राजधानी Islamabad इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बनी हुई है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच संभावित दूसरे दौर की वार्ता को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। 21 अप्रैल को प्रस्तावित इस बैठक को लेकर अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि दोनों देश आमने-सामने बैठेंगे या नहीं। बावजूद इसके, पाकिस्तान ने मेजबान देश के तौर पर पूरी तैयारी कर रखी है। माहौल ऐसा है जैसे किसी बड़े आयोजन का मंच सज चुका हो, लेकिन मेहमानों के आने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सख्त सुरक्षा के बीच हाई-प्रोफाइल इंतजाम

इस संभावित वार्ता के लिए Serena Hotel Islamabad के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे इलाके को रेड जोन घोषित कर दिया गया है और कई प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया गया है। आसमान में लगातार हेलीकॉप्टर गश्त कर रहे हैं, जबकि जमीन पर पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 20,000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को सुरक्षा के लिए बुलाया गया है, जिससे यह साफ है कि पाकिस्तान इस आयोजन को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

कूटनीतिक स्तर पर जारी है बातचीत और असमंजस

जहां एक तरफ पाकिस्तान इस वार्ता को सफल बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच अब भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। ईरान की ओर से यह संकेत दिया गया है कि दबाव की राजनीति के तहत बातचीत संभव नहीं है। वहीं अमेरिका की ओर से प्रतिनिधिमंडल के रवाना होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इन परिस्थितियों में यह कहना मुश्किल है कि बैठक तय समय पर होगी या नहीं, लेकिन पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत जारी है।

पाकिस्तान की छवि सुधारने की कोशिश

पाकिस्तान इस बैठक को अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने के एक अवसर के रूप में देख रहा है। लंबे समय से सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों को लेकर आलोचना झेल रहे पाकिस्तान के लिए यह एक मौका है कि वह खुद को शांति स्थापित करने वाले देश के रूप में पेश करे। यही वजह है कि सुरक्षा से लेकर मेहमाननवाजी तक हर स्तर पर तैयारियां की गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह बहुप्रतीक्षित वार्ता वास्तव में होगी या नहीं।

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