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1600 करोड़ का अमेरिकी ‘सुपर ड्रोन’ आखिर कहां गया? होर्मुज के ऊपर लापता होने से बढ़ा बड़ा रहस्य

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर अमेरिका का MQ-4C ट्राइटन ड्रोन रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया। 1600 करोड़ कीमत वाले इस ड्रोन के गायब होने से अमेरिका-ईरान तनाव के बीच नए सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिका की नौसेना का एक बेहद आधुनिक और महंगा निगरानी ड्रोन अचानक रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है। MQ-4C Triton ड्रोन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर उड़ान भर रहा था, तभी अचानक उसका संपर्क टूट गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रोन ने गायब होने से ठीक पहले 7700 कोड भेजा, जो किसी गंभीर इमरजेंसी का संकेत होता है। बताया जा रहा है कि यह ड्रोन फारस की खाड़ी में करीब तीन घंटे तक निगरानी करने के बाद अपने बेस लौट रहा था, लेकिन रास्ते में उसका रुख थोड़ा ईरान की ओर मुड़ा और फिर वह तेजी से नीचे गिरते हुए रडार से गायब हो गया। इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इतने एडवांस सिस्टम के बावजूद यह ड्रोन कैसे लापता हो गया।

दुनिया का सबसे महंगा ड्रोन, तकनीक जानकर हो जाएंगे हैरान

जिस ड्रोन के लापता होने की खबर सामने आई है, वह अमेरिका की सबसे एडवांस तकनीकों में से एक माना जाता है। MQ-4C ट्राइटन ड्रोन की कीमत करीब 200 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1600 करोड़ रुपये बताई जाती है। यह ड्रोन 50,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ सकता है और 24 घंटे से अधिक समय तक लगातार मिशन पर रह सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह एक बार में बहुत बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी कर सकता है और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। इसकी रेंज करीब 7,400 नॉटिकल मील तक है, जिससे यह लंबी दूरी तक काम करने में सक्षम है। यह ड्रोन अक्सर Boeing P-8 Poseidon जैसे गश्ती विमानों के साथ मिलकर काम करता है, जिससे समुद्री सुरक्षा और भी मजबूत होती है। ऐसे में इस स्तर के ड्रोन का अचानक गायब होना तकनीकी और सुरक्षा दोनों दृष्टि से बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच घटना

यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। ऐसे संवेदनशील इलाके में अमेरिकी ड्रोन का इस तरह गायब होना कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है। कुछ विशेषज्ञ इसे तकनीकी खराबी मान रहे हैं, तो कुछ इसे संभावित हमले या इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ सकती है।

हर दिन अरबों का खर्च कर रहा अमेरिका

इस बीच अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य गतिविधियों का असर खर्च पर भी साफ नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इस संघर्ष की स्थिति में हर सेकंड करीब 10,000 डॉलर से ज्यादा खर्च कर रहा है। एक दिन में हथियारों और मिसाइलों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि हवाई और समुद्री ऑपरेशन भी बेहद महंगे साबित हो रहे हैं। मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे THAAD, पैट्रियट और एजिस पर रोजाना करोड़ों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा खुफिया और साइबर ऑपरेशन पर भी भारी रकम खर्च हो रही है। ऐसे में 1600 करोड़ का ड्रोन खोना सिर्फ एक तकनीकी नुकसान नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक रूप से भी अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति को और प्रभावित कर सकता है।

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