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ईरान के खिलाफ अमेरिका के खुले समर्थन में उतरा ब्रिटेन, हमले के लिए कर दिया ये बड़ा ऐलान

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले तेज, तेहरान में नए धमाके। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी अमेरिका के समर्थन में आए। जानिए मिडिल ईस्ट जंग की पूरी रिपोर्ट।

ब्रिटेन

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ ले चुका है। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बीच इजरायल ने ऐलान किया है कि उसने ईरान की राजधानी तेहरान में हमलों का नया दौर शुरू किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिमी तेहरान के घनी आबादी वाले इलाकों में तेज धमाके सुने गए और आसमान में काले धुएं के बादल छा गए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि गांधी हॉस्पिटल, एक पुलिस बिल्डिंग और नेशनल रेडियो-टेलीविजन मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों से आम लोगों में दहशत फैल गई है। अमेरिका पहले ही साफ कर चुका है कि उसके सैन्य अभियान तब तक जारी रहेंगे जब तक उसके सभी रणनीतिक लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।

1,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला, ईरान का जवाबी वार

अमेरिकी सेना के अनुसार, उसने ईरान में 1,000 से ज्यादा सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। यह कार्रवाई 28 फरवरी को हुए बड़े हमले के बाद और तेज कर दी गई। उस हमले में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा था। जवाब में ईरान ने भी इजरायल के तेल अवीव, हाइफा और अन्य शहरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। बेत शेमेश शहर में कई लोगों की मौत की खबर है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया गया। कतर, बहरीन, जॉर्डन, ओमान, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में भी धमाकों की खबरें सामने आईं। तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि जब तक जवाब पूरा नहीं हो जाता, हमले जारी रहेंगे।

यूरोप भी मैदान में, तीन बड़े देशों का संयुक्त बयान

अब इस संघर्ष में यूरोप के बड़े देश भी खुलकर सामने आ गए हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer, फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान के हमलों की निंदा की है। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए काम करेंगे। बयान में साफ कहा गया कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को खत्म करने के लिए रक्षात्मक कदम उठाए जाएंगे। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि अब यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रूप ले चुका है।

सात देशों की चेतावनी, बढ़ता वैश्विक खतरा

अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भी संयुक्त बयान जारी कर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। इन देशों ने कहा कि ईरान की कार्रवाई ने क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है और आम नागरिकों की जान जोखिम में है। उन्होंने अपने सुरक्षा अधिकार को दोहराते हुए कहा कि वे अपने नागरिकों और सहयोगियों की रक्षा के लिए एकजुट हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डाल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह संघर्ष और बड़ा रूप लेगा या कूटनीति कोई रास्ता निकाल पाएगी। आने वाले दिन तय करेंगे कि मिडिल ईस्ट में शांति लौटेगी या जंग और भड़केगी।

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