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अमेरिका में बड़ा खुलासा: खालिस्तानी नेता की हत्या की साजिश में भारतीय नागरिक ने कबूला जुर्म, अब कितनी होगी सजा

अमेरिका में खालिस्तान समर्थक नेता गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क की फेडरल अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पहले उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन अब अदालत में स्वीकार किया कि उन्होंने हत्या की योजना बनाने में भूमिका निभाई।

अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने जानकारी दी कि गुप्ता ने तीन आरोपों को स्वीकार किया है—हत्या की सुपारी देना, हत्या की साजिश रचना और पैसे के लेन-देन से जुड़ी साजिश। इन मामलों में उन्हें अधिकतम 40 साल तक की सजा हो सकती है। उनकी सजा का फैसला 29 मई को सुनाया जाएगा। गुप्ता को जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पित कर अमेरिका लाया गया था और तब से वह जेल में हैं।

 कैसे रची गई पूरी साजिश

अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, साल 2023 में गुप्ता ने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया जिसे वह सुपारी किलर समझ रहे थे। उन्होंने पन्नून की हत्या के लिए 1 लाख डॉलर में सौदा तय किया और 15 हजार डॉलर एडवांस दिए। लेकिन जिस व्यक्ति से वे संपर्क में थे, वह असल में अमेरिकी एजेंसियों का गुप्त अधिकारी निकला।

चार्जशीट में बताया गया है कि एक और व्यक्ति, जिसकी पहचान विकाश यादव के रूप में हुई, ने गुप्ता से संपर्क किया था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उसी ने इस पूरी योजना की शुरुआत की। जांच में यह भी सामने आया कि गुप्ता को लगा कि वह अमेरिका से बाहर रहकर यह साजिश कर सकते हैं और उन पर कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

निज्जर हत्या से भी जुड़ा मामला

जांच के दौरान अमेरिकी एजेंसियों ने इस साजिश को कनाडा में मारे गए खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से भी जोड़ा है। निज्जर की जून 2023 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। चार्जशीट के अनुसार, हत्या के बाद उससे जुड़ी जानकारी गुप्ता को भेजी गई थी।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की हत्या की साजिश नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसी कारण इस पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसके देश में किसी भी नागरिक की हत्या की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

भारत सरकार का पक्ष और आगे की कार्रवाई

जब यह मामला सामने आया, तो भारत सरकार ने कहा कि वह अमेरिका से मिले इनपुट को गंभीरता से ले रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बयान दिया था कि चार्जशीट में जिस व्यक्ति का नाम है, वह अब सरकार में काम नहीं कर रहा है। इसके बाद भारत ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई।

गृह मंत्रालय ने बाद में बताया कि जांच पूरी कर ली गई है और एक व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। अब सबकी नजर 29 मई पर है, जब अदालत निखिल गुप्ता की सजा का ऐलान करेगी। अगर उन्हें अधिकतम सजा मिलती है, तो यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा उदाहरण बन सकता है।

 

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