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आसमान में भारत की सबसे बड़ी तैयारी! 114 राफेल भारत में बनेंगे, रक्षा मंत्रालय कर रहा ये बड़ी टीम

भारत की वायुसेना को ऐतिहासिक मजबूती मिलने वाली है। रक्षा मंत्रालय 3.25 लाख करोड़ रुपये की मेगा डील के तहत 114 राफेल फाइटर जेट भारत में बनाने पर विचार कर रहा है।

भारतीय वायुसेना इस समय एक गंभीर चुनौती से जूझ रही है। स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की तुलना में मौजूदा स्क्वाड्रन संख्या काफी कम है, जिससे भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना की ताकत को निर्णायक रूप से बढ़ाने के लिए एक बेहद अहम कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद पर गंभीर चर्चा चल रही है। यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक के एजेंडे में शामिल है। अगर यह सौदा मंजूरी पाता है, तो यह न केवल भारतीय वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी डील होगी, बल्कि आने वाले दशकों तक भारत की हवाई शक्ति की रीढ़ भी बनेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात में यह फैसला केवल एक खरीद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य जरूरत बन चुका है।

मेक इन इंडिया को मिलेगी असली उड़ान

इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी और खास शर्त यह है कि 114 राफेल फाइटर जेट्स का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इस प्रोजेक्ट में कम से कम 30 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक, उपकरण और पुर्जों का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। इसका सीधा फायदा भारत की घरेलू एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण इंडस्ट्री को मिलेगा। इससे हजारों इंजीनियरों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, भारत को केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक बनाने की दिशा में यह एक मजबूत कदम होगा। जानकारों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से भारत को अत्याधुनिक विमान निर्माण की तकनीक सीखने का मौका मिलेगा, जो भविष्य में स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रमों को भी मजबूती देगा। मेक इन इंडिया की सोच को अगर किसी रक्षा सौदे से असली पहचान मिल सकती है, तो वह यही डील मानी जा रही है।

चीन-पाकिस्तान चुनौती और राफेल की रणनीतिक ताकत

राफेल फाइटर जेट को दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। इसकी तैनाती भारत को चीन और पाकिस्तान के साथ संभावित टू-फ्रंट वॉर की स्थिति में जबरदस्त रणनीतिक बढ़त दिला सकती है। लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें, अत्याधुनिक रडार सिस्टम, बेहतरीन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता और हर मौसम में ऑपरेशन की ताकत राफेल को बेहद खास बनाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन विमानों के शामिल होने से भारत की सीमाओं पर निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और हवाई दबदबा कई गुना बढ़ जाएगा। खासतौर पर चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और पाकिस्तान की आक्रामक रणनीति के बीच यह सौदा भारत के लिए एक मजबूत जवाब माना जा रहा है। राफेल केवल एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि भारत की बदलती सैन्य सोच और आक्रामक रक्षा नीति का प्रतीक बन सकता है।

फ्रांस के साथ साझेदारी

114 राफेल जेट्स की यह डील भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ यह साझेदारी केवल खरीद तक सीमित नहीं होगी, बल्कि तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त उत्पादन और दीर्घकालिक सहयोग का रास्ता भी खोलेगी। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी डील को अंतिम रूप देने में समय लगना स्वाभाविक है। अनुबंध पर हस्ताक्षर, उत्पादन की व्यवस्था और चरणबद्ध डिलीवरी में कई साल लग सकते हैं। इसके बावजूद सरकार की मंशा इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की है, ताकि वायुसेना की घटती ताकत को समय रहते मजबूत किया जा सके। अगर सब कुछ योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में भारत का आसमान पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और ताकतवर नजर आएगा।

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