हंगामा है क्यूं बरपा दीपावली के पटाखे पर

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वायुमंडल में किसी भी स्तर का धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ठंड के दिनों में सांस लेने में परेषानियों के बीच कई कारण षामिल हो जाते हैं। धूएं, प्रदूशण के साथ ही दीपावली पर छूटने वाले पटाखे भी वायु प्रदूशण को बढ़ा देते हैं। प्रदेष सरकारें जहां वायु प्रदूशण को देखते हुए पटाखों पर रोक लगाती जा रही हैं वहीं लोगों में त्यौहार की खुशियां पर प्रतिबंध होने जैसा है। ऐसे में हंगामा होने से पहले उसे जानना जरूरी है। पराली जलाने से निकलने वाले धुआं और पटाखे की गंध और धुओं स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। धुएं और गंध से सांस लेना मुष्किल हो जाता है। धुआं हवा में प्रदूशक एलर्जी पैदा करते हैं जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। ठंड के मौसम में एलर्जी, सांस में कठिनाई के मरीज बढ़ जाते हैं।

ठंड के मौसम में ठंडी हवा ष्वांस नली में सिकुड़न पैदा करती है। पटाखे जलाने के बाद धूल के कण हवा में बढ़ जाते हैं। प्रदूशण और ठंड दोनों सांस के मरीजों के लिए घातक हो जाती है। कोरोना फेफड़े के संक्रमण से सम्बंधित है इसलिए पटाखे जलाने से बचना होगा। डॉ अरविन्द सिंह ने बताया कि स्वस्थ षरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जिसे अवष्य बचाना ही होगा। जो लोग करोना से संक्रमित हो चुके हैं, उन्हे अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बचाना ही होगा। पटाखे के धूएं से बचाने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है, जिसका उद्देष्य लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को बचाये रखना है।

धुआं और ठंड कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों के लिए घातक हो सकता है। अस्थमा, एलर्जी के मरीज दीपावली के धूंए, साफ-सफाई के दौरान निकलने वाली धूल से बचें। धूल और धुआं दोनों घातक हो सकता है। ऐसे में वातावरण का स्वच्छ रखना ही हमारे पास विकल्प है