क्यों उल्लुओं पर कहर बन जाती है दीपावली की रात,आइए जानते हैं?

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धन और ऐष्वर्य की देवी लक्ष्मी का वाहन उलूक है। दीपावली की रात उल्लुओं पर काफी भारी पड़ती है। उल्लू ऐसा पक्षी है जो माना जाता है कि रात में विचरण करता है। साथियों आपको जानकर हैरानी होगी की दीपावली की रात इस पक्षी की कीमत 10 से 50 हजार के बीच हो जाती है। मां लक्ष्मी के वाहन के साथ लोगों की क्रूर नजर काम करती है। उलूक का वध कर धन की कामना करने लगते हैं। विज्ञान कितना ही तरक्की कर लेकिन कुछ लोगों का अंधविष्वास उल्लुओं की जिन्दगी पर भारी पड़ जा रहा है। दीपावली की रात इस पक्षी की बलि चढ़ा दी जाती है। बलि देने वाले सोचते हैं कि इस बलि से धन की प्राप्ति होगी। कुछ लोग इसे तांत्रिक अनुश्ठान के रूप में करते हैं।

ज्ञात हो कि दीपावली की रात का महानिषा की रात के रूप जाना जाता है। इस रात को तांत्रिक अनुश्ठान के माध्यम से अपनी सिद्धि करते हैं। तंत्र साधना की प्रक्रिया साधक और उसके गुरू पर निर्भर करती है।क्यों उलूक को माना जाता है अषुभ उल्लु के नाम पर आम तौर पर पिछड़ा, कम जानकार, अषुभ ही माना जाता है। उलूक के प्रति सकारात्मक धारणा समाज में नहीं है बल्कि उल्लू षब्द मुहावरे के रूप में प्रयोग होता है। सच तो यह है कि उलूक रात में विचरण करता है और किसानों के लिए मददगार है। चूहा, कीट, पतंगों का खा जाता है।

भ्रम और अंधविष्वास है कारण उलूक के षरीर का अलग-अलग प्रयोग तांत्रिक प्रक्रिया के रूप में किया जाना भ्रम और गलत है। किसी भी जीव का अधिकार है कि प्रकृति के साथ रहे और वन्यजीव का संतुलन बनाये रखे।