एक नन्हा बंदर इन दिनों पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। इस शिशु बंदर का नाम ‘पंच’ रखा गया है। जन्म के तुरंत बाद उसकी मां ने उसे स्वीकार नहीं किया और उसे छोड़ दिया। आमतौर पर ऐसे मामलों में शिशु जानवरों का बच पाना मुश्किल होता है, लेकिन चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पंच को अपने हाथों से पाला, दूध पिलाया और उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखा।
शुरुआती दिनों में पंच काफी कमजोर था और मां की कमी साफ दिखाई देती थी। वह अक्सर अकेला बैठा रहता और किसी सहारे की तलाश करता दिखता था। कर्मचारियों ने महसूस किया कि उसे सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारे की भी जरूरत है। इसी सोच के साथ उसे एक नारंगी रंग का सॉफ्ट टॉय दिया गया, ताकि वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सके। किसी ने नहीं सोचा था कि यही खिलौना उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा बन जाएगा।
खिलौने को माना ‘मां’, हर पल साथ रखने लगा
जैसे ही पंच को वह सॉफ्ट टॉय मिला, उसने उसे कसकर अपने सीने से लगा लिया। धीरे-धीरे वह उसे हर जगह साथ ले जाने लगा। कभी उसे अपनी पीठ पर लादकर घूमता, तो कभी उसी के साथ सो जाता। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पंच को खिलौने से लिपटकर बैठे देखा जा सकता है। यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला है कि लोग इसे देखकर अपनी आंखें नम होने से नहीं रोक पा रहे।
पंच का यह व्यवहार जानवरों की भावनात्मक दुनिया को भी सामने लाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिशु जानवर भी इंसानों की तरह जुड़ाव महसूस करते हैं। जब उन्हें मां का सान्निध्य नहीं मिलता, तो वे किसी वस्तु या व्यक्ति में वही सुरक्षा खोजने लगते हैं। पंच के लिए यह नारंगी खिलौना सिर्फ एक खिलौना नहीं, बल्कि मां का विकल्प बन गया। यही वजह है कि वह उसे एक पल के लिए भी खुद से दूर नहीं होने देता।
सोशल मीडिया पर उमड़ा प्यार
पंच की कहानी सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। जापान में लोग #HangInTherePunch और #GanbarePunchkun जैसे हैशटैग का इस्तेमाल कर उसके लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। हजारों लोग रोज उसकी तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि पंच ने उन्हें यह सिखाया कि हालात चाहे जैसे भी हों, जीने की उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
इस भावनात्मक जुड़ाव को देखते हुए IKEA जापान ने भी पहल की। कंपनी ने चिड़ियाघर को कई ओरंगुटान सॉफ्ट टॉय दान किए, ताकि अगर पंच का पसंदीदा खिलौना खराब हो जाए तो उसके पास वैसा ही दूसरा साथी मौजूद रहे। यह कदम सिर्फ एक दान नहीं, बल्कि संवेदनशीलता की मिसाल बन गया। लोगों ने इस पहल की भी जमकर तारीफ की और कहा कि यह इंसान और जानवर के रिश्ते को और मजबूत करता है।
अब असली झुंड में घुलने-मिलने लगा पंच
समय के साथ पंच में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब वह धीरे-धीरे अपने असली बंदर समूह के करीब आ रहा है। चिड़ियाघर के कर्मचारियों के अनुसार, दूसरे बंदरों ने उसे स्वीकार करना शुरू कर दिया है। वे उसे ग्रूमिंग यानी साफ-सफाई के जरिए अपनापन दिखा रहे हैं। यह संकेत है कि पंच अब सामाजिक जीवन की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि वह अभी भी अपने नारंगी खिलौने को साथ रखता है, लेकिन अब उसमें आत्मविश्वास बढ़ता दिखाई देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे वह अपने समूह के साथ ज्यादा समय बिताएगा, उसकी भावनात्मक निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है। फिलहाल पंच की यह कहानी दुनिया भर में उम्मीद और संवेदना का संदेश दे रही है। यह घटना बताती है कि प्यार और देखभाल किसी भी जख्म को भरने की ताकत रखते हैं, चाहे वह इंसान हो या एक नन्हा बंदर।