राम मंदिर निर्माण में इस्तेमाल की जाएगी इतने हजार पवित्र स्थानों की मिटटी और जल

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AYODHYA (1)

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। पांच अगस्त को होने वाले शिलान्यास में देशभर के करीब आठ हजार पवित्र स्थलों से मिट्टी, जल और रजकण का इस्तेमाल किया जाएगा। कार्यक्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि देश भर से मिटटी और जल संग्रह का मकसद है लोगों को सामाजिक समरसता का देना है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल के अनुसार, देश भर से अयोध्या पहुंचने वाली मिट्टी एवं जल का आंकड़ा अभी तक जोड़ा नहीं गया है लेकिन अनुमान के मुताबिक सात-आठ हजार स्थानों से मिट्टी, जल एवं रजकण पूजन के लिए अयोध्या पहुंचेगा. दो दिन पहले तक के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 3,000 स्थानों से मिट्टी और जल अयोध्या पहुंच चुका है।

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चौपाल ने कहा झारखंड में सरना स्थल’ आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है। जब हम उस स्थान की मिट्टी एकत्र करने गए तो दलित और आदिवासी समाज में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। उनका कहना था कि राम और सीता तो हमारे हैं, तभी तो वन गमन के समय हमारी माता शबरी की कुटिया में पधारे और जूठे बेर खाए। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे बताते हैं कि भगवान राम ने सामाजिक समरसता और सशक्तीकरण का संदेश स्वयं के जीवन से दिया। परांडे ने कहा कि भगवान राम द्वारा अहिल्या का उद्धार, शबरी और निषादराज से प्रेम एवं मित्रता सामाजिक समरसता के अनुपम उदाहरण हैं।विहिप सूत्रों ने बताया कि काशी स्थित संत रविदास जी की जन्मस्थली, बिहार के सीतामढ़ी स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम, महाराष्ट्र में विदर्भ के गोंदिया जिला के कचारगड, झारखंड के रामरेखाधाम, मध्य प्रदेश के टंट्या भील की पुण्यभूमि से जुड़े स्थलों, पटना के श्रीहरमंदिर साहिब, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जन्मस्थान महू, दिल्ली के जैन मंदिर और वाल्मीकि मंदिर जैसे तमाम स्थलों से मिट्टी एवं जल एकत्र किया जा रहा है।

मंदराचल पर्वत से भी आई मिट्टी

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के कालीघाट, दक्षिणेश्वर, गंगासागर और कूचबिहार के मदन मोहन जैसे मंदिरों की मिट्टी के साथ ही गंगाासागर, भागीरथी, त्रिवेणी नदियों के संगम से जल अयोध्या भेजा जा रहा है। प्रयागराज के पावन संगम के जल एवं मिट्टी का भी भूमि पूजन में उपयोग किया जाएगा।बिहार की फल्गु नदी से बालू और रेत भी अयोध्या भेजा जा रहा है। पावापुरी स्थित जलमंदिर, कमल सरोवर, प्रचीन पुष्करणी तालाब, हिलसा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य से जुड़े भोरा तालाब, राजीगर की पंच वादियों की मिट्टी और जल भी भेजा जा रहा है। विहिप पदाधिकारियों ने बताया कि भूमि पूजन के लिए मंदराचल पर्वत की मिट्टी भी अयोध्या भेजी गयी है।

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