Friday, October 22, 2021

अब धर्म नहीं बनेगा बाधा, स्वतंत्र रूप से चुने जीवनसाथी, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

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अपना हमसफर चुनने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई व्यस्क व्यक्ति दूसरे धर्म में शादी करना चाहता है तो उसे इस बात की पूरी छूट दी जाएगी। साथ ही कोर्ट ने कहा अगर बच्चा बालिग है तो उसके इस शादी करने के फैसले में खुद उसके माता-पिता हस्तक्षेप नहीं कर सकते है। वह खुद से अपना जीवनसाथी चुन सकता है। इस दौरान हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर उन्हें लगता है कि इस फैसले को लेकर उन्हें कोई खतरा हो सकता है तो वह पुलिस से मदद मांग सकते है, उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी।

परिवार को फैसले से था ऐतराज

बता दें कि एक मुस्लिम महिला ने अपने धर्म से अलग हिंदू युवक से शादी की थी। शादी के बाद महिला ने जिलाधिकारी से हिंदू धर्म अपनाने की इजाजत मांगी। महिला की मांग के बाद जिलाधिकारी ने इस संबंध में पुलिस थाने से रिपोर्ट मांगी। जिलाधिकारी के आदेश पर पुलिस ने बताया कि युवक और युवती दोनों के परिजन इस शादी के खिलाफ थे। वह नहीं चाहते थे कि ऐसा हो।

महिला ने न्याय के लिए लगाई कोर्ट से मांगी मदद

दोनों ने एक दूसरे को अपना जीवनसाथी चुन लिया। लेकिन उन्हें अपने और पति की जान का खतरा महसूस हुआ। जिसके बाद महिला ने कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई। महिला के न्याय मांगने पर हाई कोर्ट ने कहा कि इस शादी में कोई भी व्यक्ति खलन नहीं डाल सकता।

दोनों को दी जाएगी पूरी सुरक्षा

सुनवाई के दौरान अपना फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों को पुलिस की ओर से सुरक्षा दी जाए। कोर्ट ने कहा किसी भी बालिग को खुद की मर्जी के अनुसार जीवन जीना का पूरा अधिकार है। ऐसे में किसी को हस्तक्षेप नहीं कर सकता यहा तक कि खुद उनके परिजन भी नहींं।

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