रंग लाया सीएम योगी का प्रयास, पूरी दुनिया सुनेगी एटा के घुंघरू की झंकार

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लखनऊ। सभी क्षेत्रों की अपनी अलग—अलग पहचान होती है। किसी की पहचान वहां की खेती पर निर्भर कर कुछ की परंपराएं व कलाओं के चलते होती है। भौतिकतावाद के दौर में कलाएं व परंपराएं जहां दम तोड़ रही हैं वहीं उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल रंग लाई है। अब एटा जनपद के बने घुंघरुओं की झनकार पूरी दुनिया में सुनाई देगी। ये घुंघरू दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के देशों में भारतीय कलाकारों के हुनर और मेहनत की कहानी बयां करेंगे। उत्तर प्रदेश योगी सरकार ने गुमनामी और बेजारी से जूझ रहे एटा जिले के घुंघरू उद्योग को फिर से जीवंत कर दिया है। इसी के तहत एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल एटा के घुंघरू देश ही नहीं बल्कि दुनिया के अधिकत्तर देशों को भी अपनी छम-छम से आकर्षित कर रहे हैं।

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी एटा के कलाकारों के हुनर और मेहनत को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाने की दिशा में पूरी मजबूती के साथ लगी हुई है। सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक दक्षिण अफ्रीकी देशों के साथ सिंगापुर, मलेशिया, कंबोडिया, जार्डन, साऊदी अरब, यूएई और ईराक जैसे देशों में कलाकारों के बीच बढ़ती एटा के घुंघरू की मांग ने सरकार की इस योजना को पंख लगा दिए हैं। दुनिया के मंच पर मिल रहे इस उपलब्धि को देखते हुए योगी सरकार ने भारत सरकार के सहयोग से इन देशों को घुंघरुओं की सप्लाई शुरू कर दी है। देश और दुनिया के अधिकत्तर देशों में मिल रहे बाजार और मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने घुंघरू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास और भी तेज कर दिए हैं।

एमएसएमई विभाग के अनुसार बीते कुछ महीनों में ही एटा के घुंघरू और घंटी के व्यापार में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। ओडीओपी योजना के तहत नए कलाकारों को प्रशिक्षण देकर इंडस्ट्री का व्यापक स्तर पर विस्तार किया जा रहा है। देश और विदेशों में बढ़ती मांग को देखते हुए पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा किया जा सके। देश में कोलकाता, मथुरा, आगरा, मुरादाबाद, वाराणसी, कानपुर और दिल्ली के साथ दक्षिण भारत में भी एटा के घुंघरू की मांग काफी बढ़ गई है। जानकारी के मुताबिक देश और विदेश में घुंघरुओं की सालाना औसत व्यापार 100 करोड़ रुपए को पार कर गया है। लोग घुंघरू और घंटी उद्योग से सीधे तौर पर जुड़ रहे हैं। ओडीओपी योजना के तहत राज्य सरकार ने उद्योग को बढ़ाने के लिए कलाकारों को 350 करोड़ रुपये के लोन के साथ ही मुफ्त प्रशिक्षण और जरूरी साजो-सामान भी उपलब्ध करा रही है।

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