Saturday, October 16, 2021

हिंदुत्व के एजेंडे ने बढ़ाई विपक्ष की मुश्किलें, नेताओं के सिर और मंच से गायब हुए मुस्लिम प्रतीक

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चार माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी की कोशिश है कि दोबारा सत्ता में आने की। तो वहीं विपक्ष की कोशिश हैं कि बीजेपी को सत्ता से दूर रखने की। हिंदुत्व के एजेंडा सेट कर बीजेपी सत्ता में रहना चाहती है। इसकी वजह से विपक्ष की पार्टियों की टेंशन बढ़ गई है क्योंकि खुद को सेक्लुयर कहलाने कहने वाले दल इस बार ‘मुस्लिम कार्ड’ खेलने से बच रहे हैं। आगामी चुनाव में कहीं बहुसंख्यक वोट खिसक न जाए इसलिए विपक्षी नेताओं ने अपने चुनावी मचों पर मुस्लिम नेताओं संख्या काफी कम कर दी है।

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अखिलेश यादव, मायावती, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयंत चौधरी सभी ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत नवरात्र माह से शुरू किये। प्रियंका गांधी ने वाराणसी के मंच से बाबा विश्वनाथ का चंदन लगाकर हुंकार भरी। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत से पहले दुर्गा सप्तशती के मंत्र उच्चारण की की। वहीं अखिलेश यादव जो अब तक मुस्लिम टोपी में सपा पोस्टर में दिखाई देते थे। अब उसकी जगह वो सिर्फ सपा की लाल टोपी लगाए हुए दिखाई देते हैं। खास बात यह भी है कि पार्टी का मुस्लिम नेता भी पोस्टर में लाल टोपी लगाए हुए ही दिखता है।

कांग्रेस की जनसभा में मुस्लिम बड़ी संख्या में दिखाई तो दिए लेकिन मुस्लिम प्रतीक नहीं दिखाई दिए। नमाजी टोपी भी अब चुनावी जनसभा में किसी के सिर पर दिखाई नहीं दे रही है। नवरात्र के पहले दिन आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने अपने दादा पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह की जन्मस्थली हापुड़ के नूरपुर से जन आशिर्वाद यात्रा शुरू की है, जबकि मायावती ने 9 अक्टूबर को कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर मिशन-2022 की शुरुआत की।

सपा ने भी नवरात्र (12 अक्टूबर) में ही ‘समाजवादी विजय रथ यात्रा’ शुरू की। इसके माध्यम में उन्होंने कानपुर-बुंदेलखंड इलाके के जिलों का दौरा किया। सूबे में बीस प्रतिशत मुस्लिम वोट बैंक हैं, जिनका प्रभाव 143 सीटों परह है। 70 सीटों पर बीस से तीस प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जबकि तीस प्रतिशत से ज्यादा 73 सीटों पर है। वहीं 107 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।

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