उत्तर प्रदेश में नोएडा से जुड़े एक पुराने जमीन मामले में वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र की सरकारी सेवा खत्म कर दी गई है। सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। हरीश चंद्र 1997 बैच के PCS अधिकारी रहे हैं और कार्रवाई के समय पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग से जुड़े पद पर तैनात थे। मामला उस दौर का है, जब वह नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
जमीन के लीजबैक को लेकर उठे थे गंभीर सवाल
विभागीय जांच में नोएडा के सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 से जुड़ी बड़ी मात्रा में जमीन के लीजबैक को लेकर सवाल सामने आए। जांच के मुताबिक करीब 3.81 लाख वर्ग मीटर जमीन से संबंधित फैसलों में निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ। लीजबैक की व्यवस्था मूल रूप से पात्र स्थानीय किसानों के लिए थी और एक परिवार के लिए जमीन की अधिकतम सीमा तय थी। आरोप है कि इसके बावजूद बड़े भूखंड बाहरी लोगों और निजी कंपनियों को दिए गए।
करोड़ों की जमीन, नियमों पर उठे सवाल
जांच में जिन जमीनों का जिक्र आया, उनकी कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी गई। आरोपों के अनुसार जमीन से जुड़े सर्वे और पात्रता तय करने की प्रक्रिया में भी निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। इसी वजह से तत्कालीन अधिकारी की भूमिका जांच के दायरे में आई। बाद में विभागीय जांच में हरीश चंद्र को मामले में दोषी ठहराया गया। यह कार्रवाई कोई नया मामला नहीं है, बल्कि कई साल से चल रही विभागीय प्रक्रिया का नतीजा है।
2013 से चल रही थी कार्रवाई, अब आया बर्खास्तगी का फैसला
हरीश चंद्र के खिलाफ इस मामले में विभागीय कार्रवाई वर्ष 2013 से चल रही थी। लंबे समय तक मामला लंबित रहने के कारण उनके IAS कैडर में प्रमोशन पर भी असर पड़ा। विस्तृत जांच के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से आवश्यक मंजूरी ली गई। इसके बाद शासन ने उनकी सेवा समाप्त करने का फैसला लिया। सरकार की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
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