झण्डेवालान माता मंदिर भक्तों की हर मुराद करती है पूरी, रोचक है प्राचीन इतिहास

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Jhandewala Devi Mandir

नई दिल्ली: झंडेवालान (Jhandewalan ) एक सिद्धपीठ है जोकि राजधानी दिल्ली के मध्य में स्थित है। यह प्राचीन मंदिर झंडेवाली (Jhandewali) माता को समर्पित है। यह मंदिर करोल बाग (Karolbag) में स्थित है। भक्त माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में यहां आते है। ऐसी मान्यता है कि झंडेवाली मां के दर्शन से लोगों की हर मुराद पूरी होती है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है। इस मंदिर के सुबह 5 बजे से कपाट खुलते ही भक्तों की कतारें लगना शुरू हो जाती हैं। कोरोना संकट से पहले यहां दिनभर में 5 से 6 हजार श्रद्धालु हर दिन यहां दर्शन के लिए आते थे। कोरोना काल में एक से दो हजार भक्त माता झंडेवाली के दर्शन के लिए मंदिर में आते हैं।

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झंडेवाला माता मंदिर में दर्शन का समय गर्मियों में सुबह 5 बजे से 1 बजे तक और शाम 4 बजे से 10 बजे तक हैं जबकि सर्दियों में मंदिर सुबह 5.30 बजे से 1 बजे तक और संध्या के समय 4 बजे से 9.30 बजे तक दर्शन के लिए खोला जाता है। मंगल आरती 5 बजे होती है जिसमें सूखा मेवा भोग लगता है। फिर सुबह 9 बजे आरती होती है और फिर रात 8 बजे संध्या आरती होती है। लेकिन अब कोरोना संक्रमण के कारण आरती मंदिर के youtube चैनल पर लाइव भी दिखाई जाती है।

क्यों पड़ा झंडेवाला मंदिर नाम?
बताया जाता है 100 साल से भी पहले दिल्ली के एक व्यापारी श्री बद्री भगत को सपने में माता ने दर्शन दिए थे और कहा था कि इस बंजर जमीन में तुम्हें मेरी मूर्ति मिलेगी, जिस स्थान पर मेरी मूर्ति होगी वहां एक झंडा होगा। बद्री भगत ने जब मूर्ति ढूंढी तो इसी जगह उन्हें झंडे के नीचे माता की मूर्ति मिली। तब से उन्होंने यहां मूर्ति की स्थापना की और इस मंदिर का नाम झंडेवाला मंदिर पड़ गया।

पूरी होती है हर मनोकामना
इस मंदिर में माता झंडेवाली के अलावा, शिव जी, हनुमान जी, गणेश, जी और सरस्वती जी की भी प्रतिमा है। कहा जाता है कि जब भक्त बदरी भगत को माता की मूर्ति मिली थी, तब वो मूर्ति खंडित थी। खंडित मूर्ति की स्थापना नहीं की जाती मगर क्योंकि ये स्वयं प्रकट मूर्ति थी इसलिए इसको स्थापित कर दिया गया था। इस मंदिर की मान्यता ये है कि यहां आकर जिसने जो कुछ भी मांगा है वो उसकी मुराद अवश्य पूरी हुई है।

नवरात्रि में 24 घंटे खुला रहता है यह मंदिर
नवरात्रि में मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। यहां मकर संक्रांति उत्सव भी धूमधाम से मनाई जाती है, जिसमें समाज के सभी तबके के लोग सम्मिलित होते हैं और खिचड़ी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम श्रीमद्भागवत कथा, श्री हनुमान जयंती, शिवरात्रि पर शिव तांडव नृत्य नाटिका का आयोजन किया जाता है।

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