महाशिवरात्रि के दिन ग्रहों के बन रहे हैं विशेष संयोग, जानें पूजा की विधि-शुभ मुहूर्त

247

हाशिवरात्रि का पावन पर्व 11 मार्च को है। भगवान शिव शंकर के भक्तों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा पूर्ण विधि विधान से होती है। भोले के भक्त प्रभु की कृपा पाने के लिए इस दिन व्रत रखते हैं। प्रत्येक वर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि वाले दिन महाशिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे शिव तेरस भी कहा जाता है। इस वर्ष शिवरात्रि वाले दिन ग्रहों का एक विशेष संयोग बन रहा है और मकर राशि में चंद्रमा विराजमान रहेंगे। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी पूजा जरूर करनी चाहिए। तभी पूजा पूर्ण होती है। इस दिन रात में चार बार शिव पूजा की जाती है।

महाशिवरात्रि के दिन पूजा की पूर्ण विधि
सुबह जल्दी उठकर रोजाना के सभी कामों को पूरा कर लें। इसके बाद पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। महादेव को फिर पंचामृत से स्नान कराएं। भगवान भोले को तीन बेलपत्र, जायफल, फल, मिठाई,भांग धतूरा, मीठा पान और इत्र अर्पित करें। चंदन का टीका शिवजी को लगाएं, जिसके बाद खीर का भोग लगाएं। शिवजी का ध्यान पूरा दिन करें। रात में प्रसाद के रूप में खीर का सेवन करें।

महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
तिथि – 11 मार्च, दिन- बृहस्पतिवार
निशिता काल का समय — 11 मार्च — रात 12 बज कर 6 मिनट से 12 बज कर 55 मिनट तक
पहला प्रहर — 11 मार्च — शाम 06 बज कर 27 मिनट से 09 बज कर 29 मिनट तक
दूसरा प्रहर — 11 मार्च — रात 9 बज कर 29 मिनट से 12 बज कर 31 मिनट तक
तीसरा प्रहर — 11 मार्च — रात 12 बज कर 31 मिनट से 03 बज कर 32 मिनट तक
चौथा प्रहर — 12 मार्च — सुबह 03 बज कर 32 मिनट से सुबह 06 बज कर 34 मिनट तक
शिवरात्रि पारण का समय –12 मार्च, सुबह 06 बज कर 34 मिनट से शाम 3 बजकर 02 मिनट तक

मान्यता है कि, महाशिवरात्रि के दिन पूर्ण विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जो शिव भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, उन पर भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है और भोलेनाथ अपने भक्तों पर कभी कोई परेशानी आने नहीं देते हैं।

इसे भी पढ़ें: Vastu Tips: घर में भूल कर भी ना रखें ये चीजें, फैलने लगती है नकारात्मक ऊर्जा