Tuesday, February 7, 2023

राजस्थान के पत्थरों से झलकेगी राममंदिर परिसर की भव्यता, जानें कितना आएगा खर्च

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अयोध्या। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की प्रकिया पूरे जोस—शोर से शुरू हो गई है। गृभग्रह को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने की सहमति के बाद अब राममंदिर और परिसर को कैसे सजाया जाएगा उस पर विचार चल रहा है। चर्चा है कि मुख्य मंदिर की तरह पूरे परिसर को भी अब राजस्थान के बंशी पहाड़पुर के पत्थरों से सजाने की बात चल रही है। इन्हीं पत्थरों से भव्य आकार के प्रवेश व निकास द्वार सहित कारीडोर, पब्लिक प्लाजा, लोटस पोंड, खंभे आदि का निर्माण किया जाएगा। इन्हीं खंभों पर लाइट, सीसी टीबी कैमरे व पब्लिक एड्रेस सिस्टम को लगाया जाएगा। इस तरह से राममंदिर निर्माण की लागत एक हजार करोड़ से अधिक हो जाएगी। खैर अभी तक जो हालात है उससे पैसा का कोई संकट नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि हिंदुओं के आस्था के केंद्र भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण लोग दान देने की बात कर रहे हैं। माना जा रहा है कि 70 एकड़ में भव्य परिसर को सजाने की तैयारी का खाका श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के नेतृत्व में इंजीनियरों की टीम तैयार कर रही है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से निर्माण कार्य के लिए अधिकृत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे रिटायर आईएएस नृपेंद्र मिश्र जल्द ही अयोध्या आने वाले हैं। इसे भी पढ़ें: एनएसए अजित डोभाल ने संभाला दिल्ली की कमान, हिंसा ग्रस्त क्षेत्रों का लिए जायजा

सूत्र की मानें तो ट्रस्टी व जिलाधिकारी अयोध्या अनुज कुमार झा के जरिए भूमि की मौजूदा स्थिति की डिजाइन मंगवा चुके हैं और इसमें विराजमान रामलला पूरबमुखी हैं। दाहिने हाथ पौराणिक व पुरातात्विक कुबेर टीला, बाएं हाथ बड़ा स्थान, सीता रसोईं और सामने मानस भवन समेत कई मंदिर शामिल हैं। इसमें विराजमान रामलला काफी ऊंचाई पर हैं, जबकि पीछे की तरफ सड़क तक गहरी खाईं है। मौजूदा समय में एक द्वार हनुमानगढ़ी-कनकभवन से आने वाली सड़क से संचालित है, जबकि मुख्य द्वार का रास्ता बंद है। पीछे वाली सड़क के किनारे भी चाहरदीवारी व लोहे की ऊंची पाइपों से बंद हैं। सूत्रों का कहना है कि 29 फरवरी को अयोध्या आ रहे निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने परिसर की भव्यता का पूरा खाका तैयार कराया है। इसमें शिलाखंडों से ही 6 मीटर चौड़ाई और 15 मीटर ऊंचाई के दो बड़े प्रवेश व निकास द्वार बनने हैं। यहां संग्रहालय भी बनाया जाएगा।

श्रद्धालु पब्लिक प्लाजा, लोटस पोंड होते हुए नए द्वार से इंट्री करेंगे और राम कॉरिडोर से होते हुए मंदिर तक पहुंचेंगे। यह काम राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से आए पत्थरों से होगा। द्वार और कॉरिडोर के पत्थरों को तराशने के लिए जल्द ही ऑर्डर दिए जा सकते हैं। द्वार पर स्वागत करते हुए मूर्तियों की नक्काशी भी होगी। नक्काशीदार खंभों में मूर्तियां उकेरी जाएंगी। पूरे परिसर में 150 से ज्यादा मूर्तियां लगाए जाने की बात चल रही है। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के साथ ट्रस्ट के महासचिव व राममंदिर मॉडल के प्रमुख शिल्पकार रहे चंपत राय भी अयोध्या आएंगे। उनके साथ कुशल इंजीनियरों की टीम भी होगी। इंजीनियरों की यह टीम कार्यशाला भी जाएगी, जहां विहिप के प्रस्तावित 128 फीट ऊंचा, 140 फीट चौड़ा और 268.5 फीट लंबे राममंदिर की तैयारी की समीक्षा करेगी।

राजस्थान में बंशी पहाड़पुर भरतपुर की रूपवास तहसील बयाना उपखंड क्षेत्र में स्थित है, जिसके चारों तरफ पानी भरा रहता है। इसका प्रयोग देश की अनेक ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में किया जाता रहा है। दिल्ली का लाल किला, बुलंद दरवाजा, बीकानेर का जूनागढ़ आदि इमारतों के साथ ही देश के अनेकों किलों का निर्माण इसी पत्थर से हुआ है, जो हजारों वर्षों से आज भी ऐसे ही खड़े हैं। इस पत्थर की खास बात यह है कि इसका रंग कभी नहीं बदलता है। यह पत्थर न केवल देश, बल्कि विदेशों में भी काफी मशहूर है, क्योंकि यह पत्थर पानी में होता है और अपने गुलाबी रंग के साथ सुंदरता के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इसे भी पढ़ें: दिल्ली हिंसा: अर्द्धसैनिक बलों पर उपद्रवियों ने फेंका एसिड

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