spot_img
Saturday, September 18, 2021

जिंदगी की जंग हारी 13 महीने कि वेदिका, नहीं बचा सका 16 करोड़ का इंजेक्शन

- Advertisement -
- Advertisement -

ऐसा कहा गया है कि शरीर है तो बीमारियाँ होना आम बात है। कुछ बीमारी छोटी होती है तो बहुत थी बड़ी भी। एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहा 13 महीने की मासूम एक गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। बीमारियां तो बहुत देखी है, लेकिन जब किसी मासूम को ऐसी गंभीर बीमारी से जूझते देखना पड़े तो एक पल की लिए सांसे थम जाती है। उस बीमारी का दर्द उससे बेहतर कोई नहीं जान सकता।

हम आपको बता दे की इनको एक बहुत ही दुर्लभ बीमारी थी जिससे 13 माह की वेदिका शिंदे जूझ रही थी इसके माँ बाप ने इसको बड़े से बड़े डॉक्टर को दिखाया लेकिन इसकी कही से ये सुनने में नहीं आया कि ठीक हो जाएगी। हालांकि इस बच्ची को दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन भी लगाया गया था। उस इंजेक्शन की कीमत थी16 करोड़ रूपए। ऐसा नहीं थी कि बच्ची के माँ बाप बहुत ही ज्यादा आमिर थे उन्होंने 16 करोड़ रूपए वित्तीय मदद के द्वारा पुरे किये थे बहुत से लोगो ने इनकी मदद करी थी पैसो के लिए, लेकिन रविवार शाम को वेदिकी शिंदे जिंदगी की जंग हार गई। वेदिका पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में।

बच्ची के पिता का कहना है

वेदिकी के पिता ने बताया कि ‘रविवार शाम को बच्ची को अचानक सांस की दिक्कत शुरू हुई। हालांकि हम तुरंत उसे पास के अस्पताल ले गए। उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया। डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए तमाम कोशिशें कीं लेकिन डॉक्टरों के हाथ भी हार लगी। बीते माह 16 करोड़ के इंजेक्शन देने के बाद उसकी हालत में सुधार आया था। पिता ने यह भी बताया कि बीते माह हमने बच्ची का जन्मदिन भी सेलिब्रेट किया था। हमे इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि यह उसका आखिरी बर्थडे है।

माँ बाप ने सोशल मीडिया पर डाली थी खबर

उस मासूम बच्ची का नाम वेदिका शिंदे था। उसकी मृत्यु से पहले उसके पैरेंट्स ने उसके साथ बनाया हुआ एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था। वीडियो को देख ऐसा लग रहा था कि अब वह पहले से ठीक है। ये रीढ़ की मांसपेशी से सम्भंधित बीमारी है ‘एसएमए टाइप-एक’ इस तरह की बीमारी होती है और वेदिका को अचानक सास लेने में दिक्कत हुई थी उसके तुरत बाद माता पिता ने उसे पास के निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। लेकिन वेदिका ने रविवार को शाम 6 बजे दुनिया को अलविदा कह दिया।

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी इस टाइप की है बीमारी

 

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए टाइप ई-1) इस बीमारी से बच्ची काफी समय से जूझ रही थी और इस बीमारी में लगने वाला इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रूपए थी। ये पैसा दान में मिले पैसो से इसको दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में इंजेक्शन दिया गया था। अगर माँ बाप की माने तो बच्ची की मौत से पहले उसके स्वास्थ में सुधार हो रहा था लेकिन फिर भी वह दुनिया को छोड़ कर चली गई। डॉक्टर्स ने बोलै बच्ची को दूध पीने में दिक्कत आ रही थी उसकी वजह से बच्ची की मौत हो गयी। और ये काफी दुखद मामला था। वो कहते है न ऊपर वाले के आगे किसी की नहीं चलती और आपका पैसा भी इसमे मदद नहीं कर सकता लेकिन इस बात का दुख था कि उस मासूम बच्ची का आखिर क्या कसूर था, जो उसे इतनी बड़ी बामीरी से जूझना पड़ा।

इसे भी पढ़ें-Tokyo Olympics : रवि दहिया ने दिलाया भारत को रजत, पीएम ने दी बधाई तो खट्टर ने किया 4 करोड़ का ऐलान

- Advertisement -
spot_img
Latest news
- Advertisement -
Related news
- Advertisement -