दिल्ली में कोरोना का केंद्र था यह जिला, इस थ्योरी पर काम करके सुधारे हालात

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सेंट्रल जिला कोरोना वायरस का केंद्र बन चुकी थी। देश के टॉप 20 प्रभावित जिलों में दिल्ली का यह जिला भी था। लेकिन अब हालात वैसे नहीं हैं। जहां जून में रोज यहां 350 मरीज मिल रहे थे जुलाई में नंबर 100 पर आ गया। यह सब दिल्लीवालों ने कैसे किया समझिए। सेंट्रल दिल्ली की बात करें तो यह तीन सबडिविजन में बंटा है। इसमें सिविल लाइंस, करोल बाग और कोतवाली, बुराड़ी जैसे इलाके आते हैं। लाल किला, जामा मस्जिद वाले इलाके जहां लोगों की भीड़ रहती है वे भी इसी में आते हैं। यह नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के बाद राजधानी का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला इलाका है। यहां प्रति स्कॉयर किलोमीटर में 27,730 लोग रहते हैं।

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सीरो सर्वे के नतीजों ने चौंकाया था- दिल्ली में जब सीरो सर्वे हुआ तो सेंट्रल दिल्ली के नतीजों ने चौंका दिया था। पता चला था कि जिले के 28 प्रतिशत लोगों को संक्रमण हुआ। शहर में यह सबसे ज्यादा था। हालांकि, स्थिति को वक्त रहते काबू किया गया। इस जिले में 5.8 लाख लोगों की जनसंख्या है जिसमें से 10,761 कोरोना मरीज मिले। इसमें से 6,721 प्रतिशत पुरुष और 4,040 महिलाएं थीं।

सेंट्रल दिल्ली में कोरोना को कंट्रोल करने में शासन-प्रशासन ने हरसंभव कोशिश की। सेंट्रल दिल्ली की डीएम निधि श्रीवास्तव बताती हैं कि यह सब हर इलाके के हिसाब से अलग रणनीति बनाने पर ही संभव हुआ। निधि ने बताया कि शुरुआत में हम देश के 20 सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक थे। फिर सबसे पहले हमने इलाके की भौगोलिक स्थिति और लोगों की मानसिकता को समझने का काम किया।

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जैसा इलाका वैसा प्लान- ​डीएम निधि ने बताया कि चांदनी महल जैसे इलाकों में इमामों और आशा वर्कर की मदद से जागरूकता फैलाई गई। क्योंकि वहां लोग उनकी सुन रहे थे। निधि ने बताया ऐसे ही करोल बाग के पास बापा नगर के दूसरे धारावी बनने के डर था। वहां लगातार केस निकल रहे थे। चांदनी महल की तरह वहां होम आइसोलेशन मुमकिन नहीं था, इसलिए संक्रमित लोगों को क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया। फिर धीरे-धीरे केसों में कमी आई। चांदनी महल जैसे इलाकों में इमामों और आशा वर्कर की मदद से जागरूकता फैलाई गई। निधि ने बताया ऐसे ही करोल बाग के पास बापा नगर के दूसरे धारावी बनने के डर था। वहां लगातार केस निकल रहे थे। चांदनी महल की तरह वहां होम आइसोलेशन मुमकिन नहीं था, इसलिए संक्रमित लोगों को क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया। फिर धीरे-धीरे केसों में कमी आई।

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