Friday, October 22, 2021

डेंगू से ज्यादा खतरनाक हैं ये दो बीमारियां, न करें अंदेखा, एक दिन में हो रही मौत

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बदलते मौसम के साथ देश में डेंगू बुखार का प्रकोप तेजी से बढ़ा हुआ है। कई राज्यों में डेंगू ने अपने पैर पसार लिए है। बड़ी संख्या में मरीज सामने आ रहे है। अस्पतालों में ज्यादा से ज्यादा मरीज डेंगू के ही पहुंच रहे हैं। वहीं सौ से ज्‍यादा बच्‍चों और बड़ों की हो चुकी मौत ने चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। हालांकि डेंगू के मामलों के साथ ही एक नया ट्रेंड दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू बुखार (Dengue Fever) से ज्‍यादा खतरनाक इस समय डेंगू से ही संबंधित फैली दो नई बीमारियां हैं। यही वजह है कि इस बार ये बीमारी खतरनाक जानलेवा है और मरीजों की मौतों का रिकॉर्ड तेजी से बढ़ रहा है।

एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में डेंगू के नोडल अधिकारी बनाए गए प्रोफेसर मृदुल चतुर्वेदी ने हुई बातचीत के दौरान बताया कि डेंगू के जो मामले आ रहे हैं उनमें देखा गया है कि डेंगू बुखार से लोगों या बच्‍चों की जान नहीं गई बल्कि डेंगू की अगली स्‍टेज या कहें कि डेंगू संबंधित दोनों बीमारियां डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम (Dengue Shock Syndrome) और डेंगू हैमरेजिक फीवर (Dengue Hemorrhagic Fever) ज्‍यादातर मौतों होने की वजह बन रहे हैं। Dengue Shock syndrome and dengue Hemorrhagic fever is responsible for dengue  deaths in up bihar mp haryana dlpg - डेंगू बुखार से ज्‍यादा खतरनाक डेंगू  संबंधित ये दो बीमारियां, महज एक दिन में हो रही मरीज की मौत – News18 Hindiएसएन में आसपास के जिलों से रैफर होकर आने वाले अधिकतर मामले भी ऐसे ही रहे हैं जिनमें ये दो बीमारियां पाई गई हैं। हालांकि डेंगू के दूसरी या तीसरी स्‍टेज पर पहुंचने और पर्याप्‍त इलाज न मिलने के कारण स्‍थानीय लेवर से इन बीमारियों से ज्यादातर मरीजों की जान जा रही है।

प्रोफेसर चतुर्वेदी कहते हैं कि कोविड की तरह ही डेंगू का भी कोई स्‍पष्‍ट इलाज नहीं है। मुख्‍य रूप से मरीज में डेंगू की पुष्टि होने के बाद उसके लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। उसकी सभी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। उसी को ध्यान में रखकर मरीजों को आहार और दवाओं की संतुलित खुराक दी जाती है।

घर पर भी हो सकता है सामान्‍य डेंगू का इलाज

प्रो. चतुर्वेदी कहते हैं कि मेडिकल साइंस के हिसाब से डेंगू को तीन भागों में बांट दिया गया है। क्लासिकल (साधारण) डेंगू फीवर, डेंगू हेमरेजिक फीवर (DHF) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)। जहां तक सामान्‍य सा साधारण डेंगू की बात है तो बिना लक्षणों वाले कोविड की तरह ही यह घर में अपने आप भी ठीक हो जाता है। इसके लिए बस मरीज के आहार का ध्‍यान रखना होता है अगर इससे ज्यादा किसी प्रकार की कोई दिक्कत परेशानी होती है तो वह आपके लिए जानलेवा हो सकती हैं। इन दोनों बीमारियों का इलाज अस्‍पताल में ही संभव है. इन बीमारियों में मरीज के शरीर के अन्‍य अंगों पर प्रभाव पड़ने लगता है और उसकी हालत बिगड़ने लगती है।

क्‍या है डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम

डेंगू शॉक सिंड्रोम डेंगू का ही रूप है। यह डेंगू बुखार की दूसरी और तीसरी स्‍टेज में होता है। जब मरीज का बुखार कई दिन तक नहीं उतरता है साथ ही बॉडी पेन भी होता है तो समझ जाइये की ये उसकी शुरूआत है। होंठ नीले पड़ने लगते हैं। त्‍वचा पर लाल चकत्‍ते और दाने तेजी से निकल आते हैं। साथ ही मरीज की नब्‍ज बहुत धीमे चलने लगती है। इसमें मरीज का तंत्रिका तंत्र बेकार होने लगता है और वह लगभग सदमे की हालत में आ जाता है। इसलिए इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है। डेंगू के दौरान बीपी भी नापना बहुत जरूरी होता है। अगर बीपी घटने लगे तो स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज को अस्‍पताल में भर्ती कराना सबसे जरूरी होता है।

डेंगू को लेकर ये रखें ध्‍यान

.अगर बच्‍चे या बड़े को लगातार फीवर आ रहा है तो उसे पैरासीटामोल दें और घर पर ही लि‍क्विड डाइट देने के साथ मच्‍छरों से भी मरीज को बचाएं।

.बुखार के मरीज का दिन में कई बार बीपी चेक करें। अगर बच्चा है तो उससे पूछे कि कही से खून तो नहीं आ रहा है। अगर ऐसा कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

. एक या दो दिन में बुखार उतर रहा है तो घबराने की बात नहीं है लेकिन अगर फीवर बढ़ता ही जा रहा है तो फिर चिंता की बात है। आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

. अगर बुखार के साथ ही बच्‍चे के शरीर पर च‍कत्‍ते पड़ रहे हैं, वह सुधबुध खोए है और उसे ठंड व कंपकंपी जैसी लग रही है तो ये लक्षण खराब हैं। ऐसे में बच्‍चे को बिना देर किए अस्‍पताल में ले जाकर डॉक्टर को दिखाए।

. बच्‍चों को पूरी आस्‍तीन के कपड़े पहनाकर रखें, मच्‍छरों से बचाव करें। कहीं भी पानी जमा न होने दें।साफ-सफाई का ध्‍यान रखें।

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