किसान आंदोलन में पड़ रही फूट, कोई सरकार से बातचीत करने को तैयार तो किसी ने रखी यह शर्त

144
KISAA ANDOLAN

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले नवंबर माह से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों में अब फ़ूट पड़ती नजर आ रही है। ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि सरकार से बातचीत को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन नेताओं के बयानों में विरोधाभास नजर आ रहा है।

इसे भी पढ़ें:-कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की ट्रैक्टर रैली शुरू, राजपथ पर करेंगे परेड

गौरतलब है कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉडर्स पर हजारों किसान जमा हैं, लेकिन गणतंत्र दिवस पर आयोजित किसान टैक्टर रैली के दौरान भड़की हिंसा के बाद आंदोलन कुछ कमजोर पड़ने लगा था और किसान घर लौटने लगे थे किन्तु किसान नेता राकेश टिकैत के भावुक आंसुओं ने एक बार फिर बॉर्डर का नजारा बदल दिया। देखते ही देखते आंदोलन दोबारा से कई गुना तेजी से बढ़ गया। घर वापस लौट रहे किसानों ने फिर से बॉर्डर की ओर रुख कर लिया। अब पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने लगे।

बयान में दिखी भिन्नता

इस बीच सरकार से आगे की दौर की बातचीत को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन के नेताओं का बयान आया है, लेकिन इन दोनों नेताओं के बयान में भिन्नता नजर आ रही है। इसे देखकर अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं न कही किसान नेताओं में अब आपस में विरोध शुरू हो गया है। गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर परेड हिंसा के बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई में कई किसानों को हिरासत में ले लिया गया था।

जल्द खत्म नहीं होगा आंदोल

इसके बाद अब संयुक्त किसान मोर्चा का बयान आया है कि ‘किसान नेता सरकार से तब बातचीत करेंगे, जब हिरासत में लिए गए किसानों को बिना शर्त रिहा किया जायेगा, वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने अपने बयान में साफ कर दिया कि यह आंदोलन जल्द खत्म नहीं होने वाला है और अक्टूबर तक तो चलेगा ही। उन्होंने कहा, ‘हमने सरकार को बता दिया कि यह आंदोलन अक्टूबर तक चलेगा। अक्टूबर के बाद आगे की तारीख देंगे। बातचीत भी चलती रहेगी।’

इसे भी पढ़ें:-गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे संजय राउत, बोले- किसानों के साथ है ठाकरे सरकार, बजट पर भी उठाए सवाल