दिल्ली बॉडर्स पर कम हो रही किसानों की संख्या, क्या खत्म हो जायेगा आंदोलन या है कोई नई रणनीति

192
kisah andoln

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में करीब 83 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर जमे किसान अब हटने लगे हैं। बहुत से किसान अब अपने घर गांव वापस जा रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसान आंदोलन अब कमजोर पड़ रहा है। बल्कि किसान अब अपनी रणनीति बदल रहे हैं औए आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर तेज करने की तैयारी कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें:-राज्यसभा में कृषि मंत्री ने विपक्ष और किसानों से किया सवाल, बताएं- कृषि कानूनों में क्या है काला?

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को लेकर लाखों किसान करीब तीन महीने से दिल्ली बॉडर्स पर जमे हैं, लेकिन अब यह जमावड़ा कम होने लगा हैं और अब यहां किसानों की संख्या घट कर आधे से भी काम रह गयी है। हालंकि इसके पीछे भी किसानों की रणनीति है। किसानों का कहना है की जिस तरह से सरकार उनकी नहीं सुन रही है उसे देख कर अब यह पक्का हो गया है कि यह लड़ाई अब लंबी चलने वाली है। ऐसे में सिर्फ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन करने से बेहतर है की देश के अलग-अलग हिस्सों में फैलकर आंदोलन को और मजबूत किया जाये।

गांव देहात में भी करेंगे सभाएं

किसान आंदोलन की नई रणनीति के तहत अब किसान देश के सभी राज्यों में बड़ी-दबी रैलियां करेंगे और आंदोलन के लिए समर्थन जुटाएंगे। इसी कड़ी में भारतीय किसान नेता राकेश टिकैत भी देश भर में महापंचायतों का आयोजन करेंगे। एक प्रदर्शनकारी किसान ने कहा ‘अगर यहां 10 लाख लोग इकट्ठा हो जाएं तो क्या होगा? क्या सरकार इन कानूनों को वापस लेगी? ऐसा लगता नही, इसलिए अब हम पूरे देश में फ़ैल रहे हैं और राज्यों से लेकर गांव देहातों तक सभाये और बैठके कर रहे हैं।

अब आंदोलन सिर्फ दिल्ली की सीमाओं तक टिक कर नहीं रह जायेगा, बल्कि हर गांव के हर घर तक पहुंचेगा, हम अलग-अलग जगहों पर महापंचायतें कर रहे हैं।’ बता दें कि किसानों ने सरकार की ओर से दिए उस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया जिसमें कानून को डेढ़ साल तक होल्ड पर डालने की बात थी। पीएम मोदी ने कहा कि यह प्रस्ताव अभी भी मौजूद है।

इसे भी पढ़ें:-कृषि कानूनों को लेकर सड़क से संसद तक मचा बवाल, अब किसान महापंचायत में बनेगी आगे की रणनीति