पूर्व सीजेआई ने देश की न्याय प्रणाली पर उठाये सवाल, बोले-बड़े बदलाव की है जरूरत

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नई दिल्ली। वर्षों से लटके पड़े राम जन्मभूमि पर फैसला सुनाने वाले भारत के पूर्व न्यायधीश रंजन गोगोई ने भारतीय न्याय व्यवस्था को खस्ताहाल बताया है। साथ हो उन्होंने उन आरोपों को ख़ारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि उन्होंने अयोध्या में रामलला के पक्ष में फैसला सुनाने बदले में राज्यसभा सीट हासिल की।

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दरअसल पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई एक चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।। इस दौरान उन्होंने कहा देश की न्यायप्रणाली पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुकी है, हर कोई भी कोर्ट जाने से बचता है, अब कोर्ट सिर्फ वहीं इंसान जाता है जो जोखिम उठा सकता है। उन्होंने कहा अगर आप अदालत जाते हैं तो आप अपने निजी मामलों को सार्वजनिक करते हैं,बावजूद इसके आपको समय से न्याय नहीं मिलता।

न्यायाधीश बनना पूर्णकालिक प्रतिबद्धता है

उन्होंने यह बातें लोकसभा के टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के कानूनी एक्शन को लेकर किये गए सवाल का जवाब देते हुए कहीं। पूर्व चीफ जस्टिस ने भारतीय न्याय व्यवस्था में बड़े बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।  उन्होंने कहा आप पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की बात तो करते हैं लेकिन देश की जर्जर न्याय व्यवस्था पर क्यों कोई बात नहीं करता है। उन्होंने कहा सही काम के लिए सही व्यक्ति की नियुक्ति होनी चाहिए, जजों की नियुक्ति वैसे होनी चाहिए जैसे अफसरों की होती है।  न्यायाधीश बनना एक पूर्णकालिक प्रतिबद्धता है। यह एक जुनून है। एक न्यायाधीश के काम के लिए कोई तय घंटे नहीं होते। वह 24 घंटे काम करता है। अगर कोई बिंदु याद आता है तो आप रात 2 बजे नींद से उठकर उसे लिखते हैं?’

आरोपों को किया ख़ारिज

इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या और राफेल को लेकर दिए गए फैसलों के एवज में राज्यसभा सदस्यता मिलने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा अगर मैं वाकई में सौदा करता तो क्या सिर्फ राजयसभा सीट लेता, भाजपा से कुछ और बड़ी मांग करता। बता दें कि पूर्व न्यायधीश रंजन गोगोई नवंबर 2019 में सीजेआई के पद से रिटायर हुए थे। इसके बाद ने मार्च 2020 में केंद्र सरकार ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया था।

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