Saturday, October 16, 2021

देश पर मंडरा रहा ब्लैकआउट का खतरा, ये हैं 4 बड़े कारण

- Advertisement -
- Advertisement -

देश में कोयले का भारी संकट बढ़ता ही जा रहा है। इस संकट का सीधा असर बिजली के उत्पादन पर पड़ रहा है। क्योंकि देश में ज्यादातर बिजली कोयले से ही बनाई जाती है। हालांकि, इस संकट के चलते ऊर्जा मंत्रालय ने दावा किया है कि जल्द ही इस संकट को दूर कर लिया जाएगा। लेकिन क्या आप जानते है कि यह संकट किस वजह से आया हैं…

1. अर्थव्यवस्था में जैसे ही सुधार हुआ तो बिजली की मांग तेजी से बढ़ गई है।
2. सितंबर में कोयला खदानों के आसपास अधिक बारिश होने की वजह से कोयले का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
3. विदेशों से आने वाले कोयले की कीमतें बढ़ीं। इससे घरेलू कोयले पर निर्भरता बढ़ गई।
4. मॉनसून की शुरुआत से पहले कोयले का स्टॉक न रखना।

अधिक मात्रा में हुई बिजली की खपत

– कोविड की दूसरी लहर के बाद अर्थव्यवस्था में काफी सुधार दिखा रहा है। दूसरी तरफ इससे बिजली की खपत बढ़ गई है। कोयला संकट से जूझ रहे रोलिंग मिल प्रोडक्शन कम करने को मजबूर, हालात ऐसे रहे  तो...आपको बता दे कि रोजाना 4 बिलियन यूनिट्स का प्रयोग किया जा रहा है और 65% से 70% तक बिजली की जरूरत कोयले से ही होती है, इसलिए कोयले पर निर्भरता बढ़ गई है।

– 2019 में अगस्त-सितंबर में बिजली की खपत 106.6 बिलियन यूनिट्स हुई थी, जबकि इस साल अगस्त-सितंबर में 124.2 बिलियन यूनिट्स की खपत हुई। इसी दौरान कोयले से बिजली का उत्पादन 2019 के 61.91% से बढ़कर 66.35% बढ़ गया। अगस्त-सितंबर 2019 की तुलना में इस साल के इन्हीं दो महीनों में कोयले की खपत 18% बढ़ गई।

– मार्च 2021 में इंडोनेशियाई कोल की कीमत 60 डॉलर प्रति टन थी जो सितंबर-अक्टूबर में बढ़कर 160 डॉलर प्रति टन हो गई। इससे कोयले के आयात में कमी देखी गई। 2019 की तुलना में आयातित कोयले से बिजली के उत्पादन में 43.6% की कमी आई है जिससे अप्रैल से सितंबर 2021 के बीच घरेलू कोयले पर 17.4 मीट्रिक टन की एक्स्ट्रा मांग बढ़ी है।

सरकार क्या कर रही है?

– कोयले के स्टॉक की देलभाल के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने 27 अगस्त को एक कोर मैनेजमेंट टीम बनाई थी। ये टीम हफ्ते में दो बार कोल स्टॉक की निगरानी और प्रबंधन का काम देखती है। गठित की गई कमेटी में ऊर्जा मंत्रालय, सीईओ, पोसोको, रेलवे और कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारी हैं।

– इस कमेटी द्वारा 9 अक्टूबर को बैठक की थी। इसमें नोट किया गया कि 7 अक्टूबर को कोल इंडिया ने एक दिन में 1.501 मीट्रिक टन कोयले को डिस्पैच किया है, जिससे खपत और सप्लाई के अंतर में कमी आ गई है। अगले तीन दिन में इस डिस्पैच को 1.6 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसे भी पढ़ें-हादसा : नाव पलटने से 100 से ज्यादा लोग नदी में डूबे, 51 शव बरामद, राहत बचाव कार्य जारी

- Advertisement -
Latest news
- Advertisement -
Related news
- Advertisement -