सुप्रीम कोर्ट की चिंता…कहीं किसानोंं की स्थिति भी तबलीगी जमात जैसी न हो जाए, जानें कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा 

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किसानों का मसला अभी खासा सुर्खियों में है। किसान अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलित हैं।  किसान सरकार से विगत दिनों लागू किए गए कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। जिसे लेकर लंबे दौर की वार्ता भी मुकम्मल हो चुकी है, मगर अभी तक प्रतिफल निकलकर सामने नहीं आया है, जहां एक तरफ किसान सरकार से इन कानूनों को  वापस लेने की मांग कर रहे हैं तो वहींं सरकार इन कानूनों को वापस लेने से साफ इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा। लेकिन हां…अगर किसानों को इन कानूनों के कुछ प्रावधानों को लेकर समस्या है तो हम इस पर विचार करने के लिए तैयार हैं, मगर किसानों का दो टूक कहना है कि जब तक इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा तब तक हमारा यह आंदोलन बेरोक जारी रहेगा। ये भी पढ़े –किसान आंदोलन का हरियाणा की सियासत पर दिखा असर, BJP-JJP गठबंधन को लगा झटका, गिर सकती है खट्टर सरकार

वहीं, अब यह पूरा मसला मालूम पड़ता है  कि कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है। जिस पर कोर्ट ने आज केंद्र सरकार से सवाल करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में जब कोरोना के चलते हालात कभी भी  दुरूह हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में इस बात का डर है कि कहीं किसानों की स्थिति भी तबलीगी जमात जैसी न हो जाए। इसे लेकर कोर्ट ने केंद्र सरकार से कुछ सवाल किए हैं। बता दें कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसएस बोबडे ने केंद्र सरकार से पूछा है कि आखिर कोरोना काल में चल रहे इस आंदोलन में किसान कितने महफूज हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि कहीं  ऐसा न हो जाए कि किसानों की स्थिति भी तब्लिगी जमात जैसी हो जाए।

विदित हो कि निजामुद्दीन स्थित मरकज केस और कोविड लॉकडाउन के दौरान भीड़ एकत्रित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा कि निजामुद्दीन मरकज में लाखों लोगों को इजाजत देकर लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाला गया था। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए  कोर्ट ने किसानों का जिक्र कर कहा कि आखिर कोरोना काल मेंं किसानों का आंदोलन किसान कितना महफूज है। कोर्ट की इस टिप्पणी पर सॉलिसिटर  जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम हालात के बारे में जानने की कोशिश करेंगे। गौरतलब है कि पिछले काफी दिनों से किसानों  का आंदोलन जारी है,  जिसे लेकर केंद्र सरकार से कई मौकों पर वार्ता भी हो चुकी है, मगर  अभी तक की हुई वार्ता निष्फल ही साबित हुई है।  अब देखना यह होगा कि आगे यह मसला क्या रूख अख्तियार करता है। ये भी पढ़े –ब्रिटेन के सिखों ने पीएम मोदी की मां को लिखा खत, किसान आंदोलन को लेकर कही ये बात