कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, टिकैत बोले— कानून वापसी तक घर वापसी नहीं

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर बड़ा फैसला लेते हुए अग्रिम आदेश तक कानून को अमल में लाए जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने एक कमेटी का भी गठन किया है। इस कमेटी में भूपिंदर मान सिंह मान, प्रेसिडेंट, भारतीय किसान यूनियन, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, इंटरनेशनल पॉलिसी हेड, अशोक गुलाटी, एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट और अनिल धनवत, शेतकरी संगठन, महाराष्ट्र को शामिल किया गया है। लेकिन अब बाद बड़ा सवाल है कि क्या किसान संगठन इस कमेटी के समक्ष पेश होंगे? क्योंकि किसान संगठनों पहले ही यह साफ कर दिया गया था कि कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के रोक का स्वागत है लेकिन हम किसी कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे। गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस बाधित करने की आशंका वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सोमवार को होगी। इसको लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने किसान संगठनों को नोटिस जारी किया है।

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वहीं सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी किसानों की घर वापसी नहीं होगी। टिकैत के इस बयान से यह साफ हो रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद प्रदर्शनकारी किसान अभी इतनी आसानी से हटने वाले नहीं हैं। क्योंकि किसान के नाम पर जिस तरह इन्हें विपक्ष का पूरा समर्थन मिला है, उससे ये लोग खुद को सरकार और कानून से ऊपर खुद को समझने लगे हैं। वहीं सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहे अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि इन लोगों को रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने के लिए जगह मिलनी चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस ने उनसे पूछा कि रैली करने के लिए प्रशासन को आवेदन करना होता है। पुलिस अपनी कुछ शर्तें रखती हैं। पालन न करने पर अनुमति रद्द कर दिया जाता है। क्या किसी ने अनुमति के लिए आवेदन किया। इस पर अधिवक्ता ने कहा कि इसके बारे में मुझे पता करना पड़ेगा।

सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए हरिश साल्वे ने कहा कि किसानों के आंदोलन में वैंकूवर के सिख संगठन सिख फॉर जस्टिस के बैनर भी लहराए जा रहे हैं। जबकि यह अलगाववादी संगठन है। यह अलग खालिस्तान चाहता है। इस पर जीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या इसका कोई प्रमाण है। सॉलि​सीटर जरनल ने बताया कि इसे एक याचिका में रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि कोर्ट की कार्रवाई से यह संकेत नहीं जाना चाहिए कि गलत लोगों को शह देने की कोशिश हो रही है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम केवल सकारात्मकता को शह दे रहे हैं।

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